
आपको चाहे सामान्य सर्दी हो या कोई गंभीर समस्या, जब भी आप डॉक्टर के पास जाते है आपके डॉक्टर आपकी समस्या के लक्षणों और उसके इलाज की जानकारी या कहे आपकी समस्या का पूरा ब्यौरा मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन में लिख देते है। सरल भाषा में कहे तो आपका मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन आपके इलाज का लेखा-जोखा है। आईये इस विषय में और जानकारी पाते है :
मूलचंद हार्ट अस्पताल, नई दिल्ली के मेडिसिन एंड कार्डियोलोजी के डॉ के के अग्रवाल ने बताया है कि दवाइयां दो प्रकार की होती हैं - प्रिस्क्राइब मेडिसिन और नॉन-प्रिस्क्राइब। नॉन-प्रिस्क्राइब, वे दवाइयां है जिनका सेवन आप बिना डॉक्टर की सलाह पर भी कर सकते है। मगर प्रिस्क्राइब दवाइयां वे है जिनका सेवन आप बिना डॉक्टर की सलाह के नही कर सकते है। यहाँ तक की आप इन दवाइयों को बिना प्रिस्क्रिप्शन के कैमिस्ट की दुकान से खरीद भी नहीं सकते है।
क्यों है जरुरी :
डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन सिर्फ आपकी समस्या का लिखित ब्यौरा नहीं होता है। बहुत सी अन्य ऐसी भी परिस्थितियां होती हैं जहाँ आप अपने इस ब्यौरे का लाभ उठा सकते है। आईये जानते है :
मूलचंद हार्ट अस्पताल, नई दिल्ली के मेडिसिन एंड कार्डियोलोजी के डॉ के के अग्रवाल ने बताया है कि दवाइयां दो प्रकार की होती हैं - प्रिस्क्राइब मेडिसिन और नॉन-प्रिस्क्राइब। नॉन-प्रिस्क्राइब, वे दवाइयां है जिनका सेवन आप बिना डॉक्टर की सलाह पर भी कर सकते है। मगर प्रिस्क्राइब दवाइयां वे है जिनका सेवन आप बिना डॉक्टर की सलाह के नही कर सकते है। यहाँ तक की आप इन दवाइयों को बिना प्रिस्क्रिप्शन के कैमिस्ट की दुकान से खरीद भी नहीं सकते है।
क्यों है जरुरी :
डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन सिर्फ आपकी समस्या का लिखित ब्यौरा नहीं होता है। बहुत सी अन्य ऐसी भी परिस्थितियां होती हैं जहाँ आप अपने इस ब्यौरे का लाभ उठा सकते है। आईये जानते है :
- कई बार प्रिस्क्रिप्शन में दी गयी दवाइयों का सही मात्रा में सेवन करने पर भी कुछ दवाइयां ऐसी होती है जिनका रिएक्शन हो जाता है। ऐसी आपात स्थिति में आपका प्रिस्क्रिप्शन बहुत मददगार साबित होता है।
- एक स्थिति यह भी है कि कई बार अनजाने में या जल्दबाजी में डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन पर गलत मात्रा या एमजी लिख देते है। सामान्यतौर पर ऐसा बहुत कम होता है। गलत एमजी की दवाइयों का सेवन रोगी जी लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा लिखित प्रिस्क्रिप्शन डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने में आपकी मदद कर सकता है।
- हमारे देश में सबसे ज्यादा गड़बड़ी होती है कैमिस्ट की दुकान से दवाइयां खरीदते समय। अक्सर डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्रिप्शन में दवा की सही एमजी लिखे होने पर भी कैमिस्ट गलत या ज्यादा एमजी की दवाइयां दे देते है। कई बार तो कैमिस्ट डॉक्टर द्वारा दी गयी दवाई से दुगुनी मात्रा या एमजी की दवाई दे देते है। हलाकि कई बार वे ग्राहक को बता देते है कि दवाई दुगुनी एमजी की है इसलिए आधी दवाई का सेवन करें। यह गलत है और रोगी के लिए खतरनाक भी है। निर्देशित मात्रा से दुगुनी दवाई का सेवन रोगी की मृत्यु का भी कारण बन सकती है। इस परिस्थिति में भी आपका मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन काम आयेगा।
ध्यान दे :
- डॉक्टर के दवाई प्रिस्क्राइब करते समय उसके सेवन और मात्रा की जानकारी डॉक्टर से ही प्राप्त कर ले।
- कैमिस्ट की दुकान से दवाई लेते समय दवाई की एक्सपायरी डेट और एमजी की जांच स्वयं भी कर ले।
- दवाईया खरीदने के बाद बिल अवश्य ले।
- जब भी डॉक्टर आपको दुबारा मिलने के लिए बुलाये, अपना प्रिस्क्रिप्शन अवश्य लेकर के जाएँ।
- किसी अन्य व्यक्ति की स्वास्थ्य समस्या के लक्षणों के आधार पर उसके मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन की दवाइयों का सेवन न करें। डॉ अग्रवाल के अनुसार, दो व्यक्तियों की समस्या के लक्षण एक सामान हो सकते है मगर उनका इलाज एक सामान हो यह जरुरी नही है। साथ ही स्वयं दवाइयों का सेवन न करें।
मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन एक महत्वपूर्ण कागज है। अपने स्वास्थ्य समस्या के इस ब्यौरे को संभल कर रखे और सही मात्रा व सही समय पर दवाइयों का सेवन करें।