मंगलवार, 26 जून 2012

ेसे रहोगे तो दिल रहेगा हमेशा जबां



अगर आप पूरी ंिजदगी अपने दिल को जबां बनाये रखना चाहते है तो आइए हम बताते है आपको कुछ दिल जबां रखने के उपाय, इन्हें अपनाइए और रहिए पूरी जिंदगी मस्त।

1. चुस्त बनें
हृदय की मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम बहुत जरूरी है। इससे हृदय की धड़कन प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है, साथ ही शरीर को रक्त से आसानी से ऑक्सीजन प्राप्त होता है, जिससे आपकी कार्यक्षमता बढ़ती है और ताकत मिलती है। कभी भी अपने शरीर पर अत्यधिक भार मत लें। अगर आपको कुछ समय के लिए थकावट महसूस हो रही है तो कार्य शुरू करने से पहले शरीर को 15 मिनट का आराम दें। जिससे आपकी कार्यशक्ति वापस बढ़ सके।

2. धूम्रपान छोड़ें
वैज्ञानिकों द्वारा यह बात सिद्ध की जा चुकी है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में दिल का दौरा या आकस्मिक हृदय रोग से मृत्यु होने की संभावना आम व्यक्तियों की तुलना में दुगुनी होती है। धूम्रपान छोड़ देने के 10 वर्षो के अंदर इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। तो आप अभी से ही धूम्रपान से मुक्त होने के लिए कदम क्यों नहीं उठातें।

3. कम वसा का इस्तेमाल
शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि वसा का कम से कम प्रयोग हृदय को कई रोगों से बचाता है। कोलेस्ट्रोल बढ़ने से हृदय पर दबाव पड़ता है। अगर आप शुरू से ही कम वसा के इस्तेमाल का नियम बना लें तो हृदय संबंधी गंभीर रोगों का सामना भी न करना पड़े।


4. वजन पर करें नियंत्रण

यदि आपका वजन अधिक है तो आपके हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसे तेजी से धड़कना पड़ता है। अधिक वजन का कारण असंतुलित भोजन और व्यायाम की कमी है, जिससे कई अन्य रोग भी जन्म लेते हैं। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है, ताजे फल, हरी सब्जियां, संतुलित भोजन का सेवन और नियमित व्यायाम।


5. जरूरी है आराम

तनावग्रस्त रहना स्वस्थ जीवन का मार्ग नहीं है। कल्पना कीजिए जैसे कि आप अत्यधिक चीजों को एकसाथ नहीं संभाल पाते हैं वैसी ही स्थिति आपके हृदय के साथ भी हो सकती है। रोज का अत्यधिक तनाव ब्लड प्रेशर को बढ़ाता तो है ही साथ ही यह हृदय की पेशियों को भी प्रभावित करता है। इसलिए तनावमुक्त रहने का प्रयत्‍‌न करें, पर्याप्त नींद लें और साथ ही आराम के लिए भी समय रखें। ध्यान करें, यह आपके लिए लाभदायक होगा।

6. खूब खाएं मछली
डायटीशियन शिखा शर्मा का कहना है कि एक या दो मछली के टुकड़े का सप्ताह में एक बार जरूर सेवन करें। ट्राउट, सालमन या टुना जैसी ऑयली मछली में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 के जरूरी तत्व होते हैं, जो कि कोरोनरी हृदय रोग के लिए दिए जाते हैं और ये रक्त के थक्के बनने से रोकथाम में मदद करता है।

7. फल खाएं
स्वस्थ हृदय के लिए जरूरी है कि रोज आपके भोजन में कम से कम पांच प्रोटीनयुक्त फल और सब्जियां हों। ये विटामिन व प्रोटीनयुक्त होते हैं जो कि एलडीएल को कम करने में सहायक होते हैं तथा कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकते हैं। हृदय को स्वस्थ व स्वच्छ रखने के लिए सभी आवश्यक तत्व फलों में होते हैं। इसलिए फलाहार जरूर करें।


8. कम करें नमक का सेवन

शरीर में सोडियम की मात्रा सही अनुपात में बनाएं रखने के लिए भोजन में नमक की कुछ मात्रा होना जरूरी है, पर ज्यादा तेज नमक हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का कारण भी बन सकता है। अपने भोजन में ज्यादा नमक न लें और ज्यादा नमकीन नाश्तों का सेवन भी कम करें। पोटेशियम के लिए फल व सब्जियां अच्छे स्त्रोत हैं जो प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में सोडियम की मात्रा बनाए रखने में सहायक होते हैं।

9. वसा से बचें
यह हमेशा कहा जाता रहा है कि अपने भोजन में अधिक वसायुक्त पदार्थ न लें। पशुओं से प्राप्त पदार्थो जैसे मांस, मक्खन, चीज में वसा अधिक पाई जाती है, साथ ही पकाए गए बिस्कुट या केक में भी यह अधिक होता है। इनसे शरीर में कोलस्ट्रॉल की मात्रा तो बढ़ती ही है साथ ही हृदय भी होने का खतरा रहता है।

मानसून, पिंम्पल्स को करें बाय-बाय



बरसात का मौसम शुरू हो गया है ऐसे में पिंम्पल्स की भी समस्या होने लगती है। क्योकि इस मौसम में कई तरह के स्किन इंफेक्शन का खतरा रहता है। जिससे ये आसानी से स्किन में पिम्पल्स बना सकते हैं।
फोड़े-फुंसियों या दाद-खाज खुजली जैसी चमड़ी की बीमारियों को पीछे प्रमुख रूप से रक्त का दूषित होना होता है। जब शरीर का खून दूषित यानी गंदा हो जाता है तो कुछ समय के बाद उसका प्रभाव बाहर त्वचा पर भी नजर आने लगता है। प्रदूषण चाहे बाहर का हो या अंदर का वो हर हाल में अपना दुष्प्रभाव दिखाता ही है। बाहरी और भीतरी प्रदूषण ने मिलकर हमारे शरीर की प्राकृतिक खूबसूरती को छीनकर कई सारे त्वचा रोगों को जन्म दिया है फोड़े. फुंसियां भी उन्हीं में से एक हैं।

आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली, जलन, फुंसियां, घमोरियां, लाल-सफेद चकत्ते जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण लगने से भी फोड़े-फुंसी या खुजली जैसी कोई त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।

यहां हम कुछ ऐसे घरेलू उपाय दे रहे हैं जो बर्सों से आजमा, और परखे हुए हैं। ये नुस्खे कारगर तो हैं ही साथ ही इनकी सबसे बड़ी खाशियत यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है ऊपर से ये हैं भी बहुत ही सस्ते हैं।

जब तक समस्या से पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल जाता मीठा यानी शक्कर से बनी, बासी, तली-गली और अधिक मिर्च-मसालेदार चीजों को पूरी तरह से छोड़ दें।

फोड़े-फुंसी, या खुजली वाले स्थान पर मूली के बीज पानी में पीस कर गरम करके लगाने से तत्काल लाभ होता होगा।

नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुंसीए या खुजली वाले स्थान पर लगाने और पानी के साथ पीने से बहुत सीघ्र लाभ होता है।

पालक, मूली के पत्ते, प्याज, टमाटर, गाजर, अमरुद, पपीता आदि को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करें।

सुबह खाली पेट चार-पांच तुलसी की पत्तियां चूंसने से भी त्वचा रोगों में स्थाई लाभ होता है।

पानी अधिक से अधिक पीएं।

सुबह उठकर 2 से 3 किलो मीटर घूमने के लिये अवश्य जाएं ताकि आपके शरीर और रक्त को शुद्ध ताजा हवा मिल सके और शरीर का रक्त प्रवाह भी सुधर सके।

ऐसे फूड आइटम को एवोइड करना चाहिए जो पिम्पल्स को बढ़ावा देते हों जैसे चीज, बटर, स्पासी और प्रजरवेटिव फूड तथा इसके साथ ही आपको आम और पाॅल्ट्री प्रोडक्ट को एवाॅइड करना चाहिए।

अगर आप बरासात के मौसम में इन बातों को अपनायेंगे तो जरूर पिंम्पल्स को दूर भगा सकते हैं।

बरसात में करें संक्रमण पर आक्रमण





बरसात के सुहाने मौंसम का सभी को इंतिजार रहता है। कुछ लोग इसे गर्मी से निजात दिलाने के लिए पसंद करते है, तो कुछ रोमेंटिकता के लिए। अब जनाब आप पसंद भी क्यों ना करें, ये मौसम ही कुछ ऐसा है। जनाब यही जो मौसम होता है भीनी-भीनी बारिश में रोमेंश का। आप भी सोच रहे होगे कि इस मौसम का क्यों ना लुत्फ उठाया जाये। तो उठाइए जनाब कौन मना कर रहा है, मगर सावधान क्योंकि इस मौसम में थोड़ी सी असावधानी आपको किसी संक्रामक बीमारी का शिकार बना सकती है। तो आइए हम बताते है आपको, इस मौसम का कैसे लुत्फ उठाया जाये और कैसे इस मौसम की बीमारियों से बचा जाये।

कब उठायें बरसात का मजा
याद रहे बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा बीमारियां फैलती हैं। ये बात सही है कि बरसात का पानी शुद्ध होता है, मगर जनाब वो शुद्ध वातावरण में रहे तभी तो शुद्ध रहेगा। मौसम की पहली दूसरी बारिश से तो खास करके बचना चाहिए, क्योकि इसमें सबसे ज्यादा अशुद्ध पानी होता है। जब दो तीन बरसात हो जायें तब आपको संक्रमण का बहुत कम खतरा रहता है।

किसे है इंफेक्शन का खतरा
वैसे तो किसी को भी इंफेक्शन हो सकता है, मगर खास करके उन लोगों को जिनकी इम्यूनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है जैसे बुजुर्गों और बच्चों या फिर किसी बीमारी से ग्रस्त मनुष्य की ? बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा खतरा रहता है सांस यानि रेस्पिरेट्री बीमारी, खाने और पीने से संबंधित बीमारी और लेप्टोस्पाइरोसिस का।

सांसों से संक्रमण
सांस की बीमारियां बड़ी ही आसानी से एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में फेल जाती हैं। कसी भी संक्रमित मनुष्य के संपर्क में आने से आपको भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। किसी संक्रमित मनुष्य द्वारा थूका गया बलगम भी आपको संक्रमित कर सकता है। इस मौंसम में ज्यादातर कोमन कोल्ड, फलू और कई तरह के रेस्पीरेट्री इंफेक्शन होते हैं।

फूड और वाटर-बोर्न इंफेक्शन
ये इंफेक्शन बरसात के दिनों में बहुत ही बडी रेंज में फैलने लगता है। सबसे पहले ये इंफेक्शन गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रेक्ट को संक्रमित करता है। इसके बाद डायरिया और वोमेंटिंग शुरू हो जाती है। डायरिया को फैलाने वाली सेलमोनेला और शिंजेला बैक्टीरिया की कई जातियां होती हैं जो ज्यादातर संक्रमित खाने और पानी से फैलती हैं। सेलमोनेला टाइफी, टाइफाइड फीवर के लिए जिम्मेदार होती हैं जिससे हाई फीवर, सिर दर्द, एब्डोमिनल पेन और डायरिया होता है। टाइफाइड फीवर के होने से कई सारे काॅप्लिीकेशन हो जाते हैं जैसे निमोनिया, मेंनिन्जाइटिस और शारीर के दूसरे भागों के डेमेज होने का खतरा हो जाता है।

खतरा लेप्टोस्पाइरल का
लेप्टोस्पाइरल में मरीज बहुत सीरियस बीमार हो जाता है। ये एक ऐसे बैक्टीरिया से फैलता है जिसे कई घरेलू और जंगली जानवर फैलाने का काम करते हैं। इससे किडनी डेमेज, लिवर और फेफड़ों का फेल हो जाना तथा मेंनिन्जाइटिस होने का खतरा रहता है। जो लोग ऐसी मिटटी और पानी के संपर्क में आते हैं जो संक्रमित जानवर के पेशाब से संक्रमित हो उन्हें इसका खतरा हमेशा बना रहता है।

कैसे बचें इंफेक्शन से
बरसात के मौसम में घर से निकलने से पहले छाता और रेनकोट लेने का खास ख्याल रखें।
ऐसे एरिया में जाने से बचें जो भीड़-भाड़ वाला हो और जहां बहुत ज्यादा गंदगी हो।
पीने के पानी का खास ख्याल रखें। हो सके तो ऐसे मौसम में उबला हुआ पानी ही पीयें।
अगर आप बाहर खाने का मन बना रहे हैं तो सुरक्षित जगह ही चुनें। सडक के किनारे खाने से बचें।
ऐसे मौसम में खुले ड्रम और पुराने टायर में पानी न भरने दें। क्योंकि मच्छर के पनपने का ये सबसे अच्छा जरिया होते हैं।
बाढ़ और बरसात के पानी में नहाने और तैरने से बचें।
खाना खाने से पहले हाथ किसी अच्छे हैंडवाॅश से साफ कर लें।

इंफेक्शन में फूड
शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए मिनरल जैसे आयरन, विटामिन्स की जरूरत होती है। ये पोषक तत्व सामान्तः हरी सब्जियों, मौसमी फलों और दूध में पाये जाते हैं। ध्यान रहे फल व सब्जियों को पूरी तरह साफ करके ही खाना चाहिए।
अगर बताई गई कुछ बातों पर खास ख्याल रखेंगे तो आप बरसात के मौंसम को पूरी तरह से इंजोय कर सकते हैं।

मंगलवार, 19 जून 2012

लगायें मेथी बढ़ायें बाल



आज कल बाल झड़ने की समस्‍या बिल्‍कुल आम हो गई है और देखा गया है कि इसकी ज्‍यादा शिकार महिलाएं हो रही हैं। बाल झड़ने की कोई उम्र नहीं होती, पर अगर आप इस पर अभी से ध्‍यान देना शुरु कर दें तो इससे आपकी बाल झाड़ने की समस्या को दूर किया जा सकता है। मेथी या फिर मेथी की पत्तिया इस समस्‍या का समाधान कर सकती हैं।

मैथी में ऐसे कई गुण होते हैं जो सिर की त्‍वचा में नमी पैदा करते है और रुसी तथा बाल झड़ने की समस्‍या को दूर करने के साथ नये बाल उगने में भी सहायता करते है। तो आइए जाने, कैसे मेथी के प्रयोग से हम बालों की समस्या से निजात पा सकते है।
उपचार और फायदा

इस प्राकृतिक जड़ी बूटी में कुछ औषधीय गुण हैं जो गंजेपन की समस्‍याएं, बाल झड़ने और पतले बालों की समस्‍या को दूर करने में सक्षम हैं। मेथी को उपयोग करने का सबसे बेहतर तरीका है कि इसके दानों को गरम पानी में उबाल लें और फिर इसको पीस कर पेस्‍ट तैयार करें और बालों की जड़ों में लगाएं। इससे देखते ही देखते आपके बाल झड़ने की समस्या खत्म हो जायेगी और साथ ही नये बाल भी उगने लगेंगे।

यह कैसे काम करती है

मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन पाया जाता है जो बालों की जड़ो को प्रोषण पहुंचाता है और बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाता है। इसके प्रयोग से सूखे और डैमेज बाल भी ठीक हो जाते हैं।

कैसे प्रयोग करें

1. मेथी को रात भर गरम नारियल तेल में भिगो कर रख दें। सुबह इसी तेल से अपने सिर पर 5-10 मिनट तक मसाज करें और गरम पानी से सिर धो लें।

2. दूसरा उपाय है कि मेथी को पूरी रात भिगो दें और सुबह उसे गाढ़ी दही में मिला कर अपने बालों और जड़ो में लगाएं। उसके बाद बालों को धो लें इससे रुसी और सिर की त्‍वचा में जो भी समस्‍या होगी वह दूर हो जाएगी।

3. मेथी या फिर इसकी पत्तियों को गुणहल के फूल के साथ मिला कर लगाने से बालों में कंडीश्‍निंग होगी और सिर को ठंडक का एहसास होगा।

4. सबसें अच्छा फंडा है मेथी की पत्तियों को भोजन के रूप में अधिक से अधिक खाया जाये इससे आपको बाल स्वस्थ्य रखने के लिए जरूरी तत्व मिल जायेंगे और ऐसे में आपके बाल ना तो झड़ेंगे और ना ही टूटेंगे।
वैसे भी मेथी सुगमता से मिलने वाली चीज है ऐसे में क्यों ना हम अधिक से अधिक मेथी का प्रयोग करें और खुद को और अपने बालों को सेहतमय बनाये रखें।

मंगलवार, 12 जून 2012

गर्मी में बचें लू से