रविवार, 13 फ़रवरी 2011

मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन : कितना है ज़रूरी


आपको चाहे सामान्य सर्दी हो या कोई गंभीर समस्या, जब भी आप डॉक्टर के पास जाते है आपके डॉक्टर आपकी समस्या के लक्षणों और उसके इलाज की जानकारी या कहे आपकी समस्या का पूरा ब्यौरा मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन में लिख देते हैसरल भाषा में कहे तो आपका मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन आपके इलाज का लेखा-जोखा हैआईये इस विषय में और जानकारी पाते है :

मूलचंद हार्ट अस्पताल, नई दिल्ली के मेडिसिन एंड कार्डियोलोजी के डॉ के के अग्रवाल ने बताया है कि दवाइयां दो प्रकार की होती हैं - प्रिस्क्राइब मेडिसिन और नॉन-प्रिस्क्राइब। नॉन-प्रिस्क्राइब, वे दवाइयां है जिनका सेवन आप बिना डॉक्टर की सलाह पर भी कर सकते है। मगर प्रिस्क्राइब दवाइयां वे है जिनका सेवन आप बिना डॉक्टर की सलाह के नही कर सकते है। यहाँ तक की आप इन दवाइयों को बिना प्रिस्क्रिप्शन के कैमिस्ट की दुकान से खरीद भी नहीं सकते है।

क्यों है जरुरी :

डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन सिर्फ आपकी समस्या का लिखित ब्यौरा नहीं होता है। बहुत सी अन्य ऐसी भी परिस्थितियां होती हैं जहाँ आप अपने इस ब्यौरे का लाभ उठा सकते है। आईये जानते है :
  • कई बार प्रिस्क्रिप्शन में दी गयी दवाइयों का सही मात्रा में सेवन करने पर भी कुछ दवाइयां ऐसी होती है जिनका रिएक्शन हो जाता है। ऐसी आपात स्थिति में आपका प्रिस्क्रिप्शन बहुत मददगार साबित होता है।
  • एक स्थिति यह भी है कि कई बार अनजाने में या जल्दबाजी में डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन पर गलत मात्रा या एमजी लिख देते है। सामान्यतौर पर ऐसा बहुत कम होता है। गलत एमजी की दवाइयों का सेवन रोगी जी लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा लिखित प्रिस्क्रिप्शन डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने में आपकी मदद कर सकता है।
  • हमारे देश में सबसे ज्यादा गड़बड़ी होती है कैमिस्ट की दुकान से दवाइयां खरीदते समय। अक्सर डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्रिप्शन में दवा की सही एमजी लिखे होने पर भी कैमिस्ट गलत या ज्यादा एमजी की दवाइयां दे देते है। कई बार तो कैमिस्ट डॉक्टर द्वारा दी गयी दवाई से दुगुनी मात्रा या एमजी की दवाई दे देते है। हलाकि कई बार वे ग्राहक को बता देते है कि दवाई दुगुनी एमजी की है इसलिए आधी दवाई का सेवन करें। यह गलत है और रोगी के लिए खतरनाक भी है। निर्देशित मात्रा से दुगुनी दवाई का सेवन रोगी की मृत्यु का भी कारण बन सकती है। इस परिस्थिति में भी आपका मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन काम आयेगा।
ध्यान दे :
  • डॉक्टर के दवाई प्रिस्क्राइब करते समय उसके सेवन और मात्रा की जानकारी डॉक्टर से ही प्राप्त कर ले।
  • कैमिस्ट की दुकान से दवाई लेते समय दवाई की एक्सपायरी डेट और एमजी की जांच स्वयं भी कर ले।
  • दवाईया खरीदने के बाद बिल अवश्य ले।
  • जब भी डॉक्टर आपको दुबारा मिलने के लिए बुलाये, अपना प्रिस्क्रिप्शन अवश्य लेकर के जाएँ।
  • किसी अन्य व्यक्ति की स्वास्थ्य समस्या के लक्षणों के आधार पर उसके मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन की दवाइयों का सेवन न करें। डॉ अग्रवाल के अनुसार, दो व्यक्तियों की समस्या के लक्षण एक सामान हो सकते है मगर उनका इलाज एक सामान हो यह जरुरी नही है। साथ ही स्वयं दवाइयों का सेवन न करें।
मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन एक महत्वपूर्ण कागज है। अपने स्वास्थ्य समस्या के इस ब्यौरे को संभल कर रखे और सही मात्रा व सही समय पर दवाइयों का सेवन करें।

रविवार, 21 नवंबर 2010

हायजीन नियम...


मौसम के बदलते रुख के साथ सामान्य सर्दी-जुकाम की समस्या का जन्म लेना कोई असमान्य बात नहीं है। यदि आप चाहते है कि घर के अन्य सदस्यों को सामान्य सर्दी की समस्या न हो तो आपको हायजीन के कुछ नियमों का पालन करना बहुत जरुरी है। आइये कुछ ऐसे ही सामान्य से नियमों को जानते है :


  • हाथों को साफ़ रखे। सबसे पुराना मगर सबसे कारगर नियम। यदि आपके हाथ कीटाणु रहित होंगे तो आप सर्दी और जुकाम के फैलने का चक्र को रोकने में कामयाब हो पाएंगे। सबसे पहले हमेशा अपने हाथो को एंटीसैप्टिक हैण्ड वाश का प्रयोग करें। आप चाहे तो आप हैण्ड सैनिटाईज़र का प्रयोग कर सकते है। अपने बैग या सीट पर हमेशा एक छोटी बोतल एंटीसैप्टिक हैण्ड वाश या हैण्ड सैनिटाईज़र की रख सकते है।
  • रुमाल आदि का प्रयोग करने से बेहतर है कि आप टिशु पेपर का प्रयोग करें।
  • घर के सभी चीजों को छूए नहीं। यह कीटाणुओ को फैलने से रोकते है।
  • घर की सभी सामान्य चीजों व कमरों को साफ़ रखे।
  • सामान्य सर्दी हो तो डॉक्टर से मिले। यह न सोचे की आपकी सर्दी सात दिन बाद अपने आप ठीक हो जाएगी।

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

माइग्रेन : महत्वपूर्ण बातें

माइग्रेन की समस्या धीरे धीरे आम बनती जा रही है। आईये जानने का प्रयास करते है कि माइग्रेन रोगी को किन बातों का ध्यान रखना है।
  1. माइग्रेन रोगी नियमित रूप से डॉक्टर द्वारा दी गयी दवाइयों का सेवन करें।
  2. अचानक से तापमान बदलाव के संपर्क में न आयें।
  3. वैकल्पिक चिकित्सा की मदद लेना बंद करें।
  4. समय समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहें।
  5. हर रोज करीब छ: से आठ घंटे की नींद ले।
  6. योग, ध्यान और मार्निग वॉक ऐसे कुछ तरीके है जो आपको स्वस्थ रखने में मदद करते है।
  7. खराब जीवनशैली भी आपको माइग्रेन का शिकार बना सकती है (विशेष रूप से खाना न खाने या समय पर न खाना न खाना)। माइग्रेन रोगी को व्रत करने और फैट्स युक्त भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए।
  8. तेज गंध वाले परफ्यूम आदि का प्रयोग न करें।
  9. स्ट्रेस माइग्रेन को बढ़ता है इसलिए खुश रहने का प्रयास करें और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं।
  10. तेज धूप के संपर्क में आने से बचें। जब भी बहार जाएँ सनग्लासिस और छतरी का प्रयोग करें।
  11. पैन किलर दवाइयों का लम्बे समय तक प्रयोग करने से बचें।
  12. जैसे ही दर्द के लक्षण दिखे पैरासिटामोल या एस्प्रिन का सेवन कर सकते है। यह दोनों ही दवाइयां बहुत प्रभावी है। ध्यान दे कि सोलह साल से कम उम्र में एस्प्रिन का सेवन न करें।

माइग्रेन केवल वंशानुगत कारणों से नही होता है इसलिए जीवनशैली को दुरुस्त रखने का प्रयास करें।

(डॉ प्रवीण गुप्ता, कंसल्टेंट न्यूरोलोजी, आर्टिमिस हेल्थ इंस्टिट्यूट, गुडगाँव)

बुधवार, 25 अगस्त 2010

नैबुलाइज़र

नैबुलाइज़र, एक ऐसा डिवाइस है जिसमें रोगी के फेफड़ों तक साँस के माध्यम से दवाई पहुँचाने के लिए इन्हेलर के तौर पर प्रयोग में लाया जाता है। इसका प्रयोग सामान्य तौर पर अस्थमा और अन्य श्वास सम्बन्धी समस्याओं के रोगियों द्वारा किया जाता है।

कितना है उपयोगी :
डॉ सुशीला कटारिया, इंटरनल कंसलटेंट, पारस अस्पताल, गुडगाँव ने इस गैजेट के बारें में जानकारी देते हुए बताया कि, "नैबुलाइज़र अस्थमा में होने वाली खांसी की समस्या में आराम देता है। यह दवाई का असर सीधे प्रभावित हिस्से पर करता है मगर इसका प्रयोग करने की तकनीक पहले अपने डॉक्टर से अवश्य पूछ ले।"

नैबुलाइज़र का प्रयोग करने के बाद उसे तुरंत साफ करना जरुरी है। अगर आप ऐसा नही करते है तो उसमें बैक्टीरिया का जन्म हो सकता है।

मार्केट में कीमत :
नैबुलाइज़र की कीमत मार्केट में 2000से 3000 के बीच में है।

सोमवार, 23 अगस्त 2010

हीटिंग पैड्स

आज भी हम सभी के घर में सिकाई के लिए वाटर बैग का ही प्रयोग किया जाता है। मगर समय के साथ बहुत सी चीजे बदलती है। अब धीरे धीरे लोग हीटिंग पैड्स का प्रयोग हॉट वाटर बैग की जगह करने लगे है। अब सिकाई करना एकदम आसन हो गया है। बस आपको इसकी वायर को पॉवर प्लग में लगाकर स्विच ऑन करना है और सिकाई का आनंद उठाना है। आपको सिकाई के लिए गर्म पानी की थैलियों को तैयार करने में जितनी मेहनत करनी पड़ती थी अब आप उसे केवल एक स्विच भर ऑन करने से प्राप्त कर सकते है।

कितना है उपयोगी :
"वैसे तो यह हीटिंग पैड्स बहुत ही उपयोगी है मगर यदि आप गर्भवती है तो पेट के निचले हिस्से में इसका प्रयोग करने से बचें। गर्भावस्था के शुरुआती 12 सप्ताह से पहले गर्भवती महिला के शारीर का तापमान 39 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा नहीं होना चाहिए इसलिए इनका प्रयोग उनके लिए हानिकारक साबित हो सकता है। मगर आप गर्भावस्था के दौरान होने वाले जांघों और पीठ दर्द में इसकी मदद ले सकते है।" ऐसा कहना है डॉ कौशिकी द्विवेदी, कंसल्टेंट गायनोकॉलोजिस्ट, मैक्स अस्पताल का।

क्या कहता का मार्केट :
हीटिंग पैड्स के लिए आपको अपनी जेब से ज्यादा पैसे खर्च करने की जरुरत नहीं है। आप केवल 350 से 700 रूपये में इसे खरीद सकते है।