बुधवार, 28 अगस्त 2013

हैंड बैग्स : बढ़ा न दें मुश्किल

हैंड बैग्स, हर महिला की जरुरत है. मगर कई बार यहीं हैंड बैग्स आपके स्वास्थ्य के लिए परेशानी का भी कारण बन जाते है. अक्सर काम काजी महिलाएं उन बैग्स को प्राथमिकता अधिक देती है जिनका साइज़ बड़ा हो. इसके पीछे का कारण साफ़ है हर महिला चाहती है कि उसके एक ही बैग में वह अपना सारा सामान समेट सकें। पर एक और बड़े बैग के चक्कर में हम कमर, गर्दन और कंधे के दर्द को निमंत्रण दे देते है. आइयें जानने का प्रयास करते है कि कैसे हैंड बैग्स आपकी मुश्किलें बढ़ा  सकता है और इनसे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए। 

हैंड बैग्स आपकी पर्सनालिटी में चार चाँद लगाते है. ये स्टाइलिश तो दीखते है मगर यह आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है. इसलिए आप दो में से किसी एक का चुनाव कर सकती है या तो आप भारी-भरकम बड़े बैग को चुनें या फिर अपने स्वस्थ शरीर को? फैसला आपका है. 

जिस तरह हम घर के साइज़ बड़े होने पर उसमे कबाड़ को ठुसने के लिए जगह बना लेते है ठीक उसी तरह हम बैग के साइज़ बड़े होने पर उसमे अनाप-शनाप सब चीज़े ठूंसने लगते है. ऐसा नहीं है की यह सिर्फ आप कर रहे है ऐसा हम सभी करते है. मगर बैग के साइज़ से आपके स्वास्थ्य को कोई नुक्सान नहीं है पर उसमे भरे सामान का बोझ आपको बहुत परेशान कर सकता है. भारी बड़े बैग्स  के कारण  आप पीठ, कमर, कंधे के दर्द से परेशा हो सकते है. डॉक्टर्स भी महिलाओं को हल्के और छोटे बैग्स को लेने की सलाह देते है.

कैसे बचे:

  • सबसे पहले मीडियम साइज़ का ही बैग ले. 
  • बैग में से बेकार की चीजो को समय-समय पर निकालते रहे. और हाँ, अपने पर्स में से सिक्के और पुराने बिल निकलते रहे ताकि आपका बैग हल्का रहे. 
  • एक ही कंधे पर बैग को लटकाए न रखे. अपने दोनों कंधो को आराम पहुचाएं और कुछ कुछ देर के लिए अपने बैग को दोनों कंधो पर ले. इससे एक ही कंधे पर दबाव नहीं पड़ेगा। 
  • अपने बैग को या तो कंधे पर लटकाए या फिर हाथ में पकडे मगर कभी भी उसे खोनी मोड़ कर हाथों के बीच में न लटकाएं। 
  • आप चाहे तो आप अपने हैण्ड बैग के साथ साथ एक लंच बैग भी ले ले ताकि आपका सामान आ जाये और कंधो व गर्दन पर जोर भी न पड़े. 
  • आप चाहे तोह आप बेक पैक का भी प्रयोग कर सकती है.
  • इसके अलावा आप उन हैण्ड बैग्स को भी ले सकते है जोकि एक कंधे से लटकते हुए दूसरी तरफ कमर पर जाते हो. इन बैग्स  का प्रयोग करने से पीठ पर दबाव कम पड़ता है. 
  • इन सबके अलावा अगर संभव हो तो बैग को थोड़ी देर के लिए काढ़े से उतार कर अपने कंधे को रेस्ट देते रहे. 
जिस तरह बच्चों के भारी भरकम स्कूल बैग्स  उनकी सेहत को नुक्सान पहुचते है ठीक उसी तरह बड़े और भारी हैंड बैग्स आपको। इसलिए, अगली बार बैग खरीदते समय बैग के साइज़ नहीं बल्कि अपने सेहत की साइड देखना न भूले। 

बुधवार, 7 अगस्त 2013

हैंड केयर फॉर मैन

ऐसा माना जाता है कि पुरुषों के हाथ कठोर और महिलाओं के हाथ कोमल होते है. मगर कठोरता का अर्थ कभी भी गंदे हाथ नहीं होता है. इसलिए यदि आप पुरुष है और आपको यह लगता है कि  हाथो की सफाई को कम महत्त्व दिया जाये तब भी ठीक है तो आप गलत है. हाथो का साफ़ सुथरा होना आपके व्यक्तित्व क सुधरता है. आइये जानते है कि कैसे आप आने हाथो की केयर कर सकते है. 

सबसे पहली बात इस बात को समझे की आपका चेहरा आपके व्यक्तित्व में जितना अहत्व रखता है उतना ही आपके हाथ. जब भी आप बात करते है या आप किसी भी व्यक्ति से मिलते है तब सबसे पहले आपके चेहरे के बाद आपके हाथ ही दूसरों के सम्पर्क में आते है. इसलिए अपने हाथों को अनदेखा न करे. 

कैसे करें शुरुआत :
  • नमी को बनाये रखे: आपके हाथ की नमी जितनी बनी रहेगी आपके हाथ उतने की कोमल रहेंगे। इसके लिए आप बाज़ार में मिलने वाली किसी अच्छी हैण्ड क्रीम का प्रयोग कर सकते है. इसके अलावा सप्ताह में दो बार अपने हाथो को चीनी से धोये. हाथ में थोड़ी सी चीनी ले, थोडा सा पानी और गुलाब जल ले. अब इसे अपने हाथो में अच्छे से मल ले. अब इसे पानी से सा कर थोडा सा गुलाब जल लगा ले. यदि आपके हाथ ड्राई बहुत है तो आप थोडा सा ओलिव आयल भी हाथो पर लगा सकते है. 
  • नाखूनों को रखे ट्रिम: आढे-तिरछे या कटे फटे नाख़ून हाथो के प्रति आपके लापरवाही भरे बर्ताव को दर्शाती है. इसलिए हमेशा अपने नाखूनों को ट्रिम करते रहे. नाखूनों को काटने के बाद फाइलर से फाइल कर नाखूनों के शपे को सुधारना न भूले। 
  • मैनीक्योर करे : मैनीक्योर की जरुरत केवल महिलाओ को ही नही होती है बल्कि पुरषों को भी इसकी उतनी ही जरुरत होती है. आप 15 से 20  दिन में एक बार मैनीक्योर करा सकते है. आजकल अलग अलग तरह के बहुत से मैनीक्योर आ गए है.
  • नेल शाइनर का प्रयोग करे: बाज़ार में नाखूनों को चमकदार बनाने वाली नेल शाइनर स्ट्राइप्स मिलती है. जिनका प्रयोग करने से नाखूनों में चमक आएगी और यह आपके नाखूनों और हाथ दोनों को खुबसूरत बनाएगी।
किन बातों का रखे ध्यान:
  • नाखूनों को दांतों से न कुतरे।
  • हमेशा नेल कट्टर का प्रयोग करें। 
  • रात में सोने से पहले हैण्ड क्रीम का प्रयोग अवश्य करें। यदि आप वेट लिफ्टिंग करते है तो हनद क्रीम का प्रयोग अधिक करें। 
  • अपने नाखुनो का प्रयोग किसी उपकरण की तरह न करें। 
हाथों को साफ़ रखें। क्योंकि  यदि आपके हाथ साफ़ होंगे तो आप खुबसूरत होने के साथ-साथ स्वस्थ भी होंगे। 


बुधवार, 31 जुलाई 2013

स्तनपान सम्बन्धी मिथक

किसी भी नवजात शिशु के लिए उसकी मां के दूध से बेहतर कोई भी भोजन नहीं होता है. मां  के दूध में वो सभी पोषक तत्व होते है जोकि शिशु के विकास के लिए जरुरी है. यहीं कारण  है कि डॉक्टर्स भी शिशु के जन्म के बाद 6 महीने तक केवल मां  का दूध देने की सलाह देते है. स्तनपान का विषय जितना महत्वपूर्ण है उतने ही इस विषय से जुड़े मिथक भी हैं. आइए, आज हम इसी विषय से जुड़े कुछ मिथकों पर चर्चा करते है.

 मिथक: शिशु के जन्म के तुरंत मां के स्तन से आने वाला पीले रंग का गढ़ा दूध विषाक्त होता है.

गलत. शिशु के जन्म के बाद निकलने वाले पीले दूध में सबसे ज्यादा पोषक तत्व होते है ज़ोकि बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ने में मदद करती है.

मिथक : स्तनपान करने में दर्द होता है.

गलत. स्तनपान कराने में किसी प्रकार का दर्द या परेशानी नहीं होती है. यदि मां को स्तनपान करने में दर्द की शिकायत है तो इसका अर्थ यह हुआ कि मां बच्चे को ठीक से पकड नहीं पा रही है या दूध पिलाते समय मां गलत ढंग से शिशु को पकड़ रही है. यदि आपके साथ ऐसी ही तकलीफ हो तो अपने डॉक्टर से बात करें। आप लैकटेशन एक्सपर्ट की भी मदद ले सकती है.

मिथक : हर बार स्तनपान करने से पहले मां  को उन्हें गिले कपडे इ साफ़ करना होता है.

गलत. मां  के दूध में किसी प्रकार के संक्रमण की आशंका नहीं रहती है इसलिए उपरोक्त कहीं गयी बात गलत है. मगर हाँ, मान को हर बार दूध पिलाने से पहले अपने हाथो को साफ़ करना जरुरी है. 

मिथक : मां को हर बार शिशु को दोनों तरफ से दूध पिलाना चाहिए।

गलत. बड़े बुजुर्गों का यह मानना है कि  यदि मां  बच्चे को दोनों स्तनों से दूध पिलायें तो बच्चे का पेट ठीक से भरता है. जबकि वास्तविकता यह है की यदि बच्चा एक तरफ से 15 से 20 मिनट तक दूध पिता है तो उसे दूसरी तरफ से दूध पिने की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ती है. 

मिथक : अगर मां  को सर्दी जुकाम है तो उसे बच्चे को दूध नहीं पिलाना चाहिए। 

गलत. मां को यदि सर्दी है तब भी मां अपने बच्चे को दूध पिला सकती है. बस जब भी दूध पिलाये आचे से हाथ साफ़ कर ले. साथ ही सफाई के नियमों का पालन करना न भूले।

मिथक : हाथ से दबाकर यह देखा जा सकता है की मां को कितना दूध हो रहा है.

गलत. हाँ ये सही है की हाथ से दबाकर दूध देखने से इस बार की जानकारी तो मिलती है की मान को दूध हो रहा है या नहीं मगर इस बात की कोई जानकारी नहीं मिलती है की कितना दूध हो रहा है.

मिथक: फार्मूला दूध मां के दूध से ज्यादा पौष्टिक होता है.

गलत. मां  के दूध में अभी पोषक तत्व होते है जोकि किसी भी फार्मूला दूध से प्राप्त नहीं किये जा सकते है.

याद रहें की मां का दूध शिशु के सर्वोत्तम विकास के लिए जरुरी है. 

गुरुवार, 25 जुलाई 2013

सप्लीमेंट्स जो बनाएं लिवर को हैल्दी

हम में से बहुत ही कम लोग ऐसे होंगे जोकि अपने लिवर के स्वास्थ्य के बारें में सोचते होंगे। जबकि लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है. लिवर का काम कुछ-कुछ हमारी स्किन की तरह है. जिस तरह हमारी स्किन त्वचा की सतह के माध्यम (पसीना) से शरीर के गंदे पदार्थो को बाहर निकलती है ठीक उसी तरह हमारा लिवर भी शरीर से टोक्सिन या विषैले पदार्थो को बाहर करने का काम करता है. सरल शब्दों में कहें तो लिवर शरीर में खाने को पचाने में मदद करता है. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है, खून से गंदगी को दूर करता है, आदि. यानी शरीर के सभी जरुरी कामों में लिवर हमेशा आगे रहता है. आप चाहे तो आप अपने लिवर को स्वस्थ बनाएं रखने के लिए डाइट्री सप्लीमेंट्स की मदद ले सकते है. आइये जानते है: 

मिल्क थिसल :

मिल्क थिसल लिवर के स्वास्थ्य को बनाये रखने में मदद करता है. बहुत से अध्ययन इस बात का प्रमाण देते है की मिल्क थिसल लिवर  के स्वास्थ्य को बेहतर करता है. मिल्क थिसल एक प्रकार का हर्ब है. आज कल के खान पान और बढ़ते एल्कोहल के सेवन का सबसे ज्यादा असर लिवर  पर पड़ता है. मिल्क थिसल एल्कोहल से होने वाले नुकसान  को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा यह ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है. मिल्क थिसल क्षतिग्रस्त लिवर को दुरुस्त करने के सहायक है. 


लिवर सप्पोर्ट फार्मूला :

यह लिवर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है. इसमें मिल्क थिसल, गोल्डनसील, रेड क्लोवर जैसे हेर्ब्स मौजूद है जोकि लिवर को दुरुस्त करते है. इस सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले डॉटर की सलाह अवश्य ले ले. 


लिवर  फार्मूला:

यह लिवर ले कार्य को ठीक से करने में सहायक है. आप जीएनसी के लिवर  फार्मूला का सेवन कर सकते है. मगर डॉक्टर की सलाह लेना न भूले। 

इन सबके अलावा भी बाजार में बहुत से डाइट्री सप्लीमेंट मौजूद है. यह सप्लीमेंट्स आपके लिवर के लिए जीवनदायनी साबित हो सकते है. 

गुरुवार, 18 जुलाई 2013

स्किन सेफ मानसून ट्रिप

सामान्य तौर पर हम सभी मानसून के मौसम में बाहर जाना पसंद नहीं करते है। हमें बारिश और उसे होने वाली स्किन परेशानियों से बचने का यहीं तरीका ठीक भी लगता है। पर बारिश के कारन बाहर न जाना किसी भी समस्या का कोई समाधान नहीं है। आइये हम सभी यह जानने का प्रयास करते है की कैसे हम अपने मानसून के ट्रिप को मजेदार और स्किन सेफ बना सकते है।

छतरी  और रेनकोट को बनाएं साथी  :

प्रदूषण के कारण अब बारिश का पानी साफ़ नहीं रह गया है। और ऐसे प्रदूषित पानी में भीगना आपकी स्किन और बाल दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते है। इसलिए यदि आप मानसून में कहीं घूमने जा रहे है तो अपने साथ छतरी या रेनकोट को ले जाना न भूलें। यह आपको स्किन सम्बन्धी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद करेगी।

एंटीसेप्टिक को रखें साथ:

जब भी बारिश के मौसन में घूमने जाएँ, अपने साथ एंटीसेप्टिक सलूशन और फंगल इन्फेक्शन के लिए मेडिसिन ले जाना न भूले। अक्सर बारिश के पानी में भीगने से स्किन संबधी समस्याएँ हो जाती है और इन समस्याओं का तुरंत उपचार जरुरी है। साथ ही यदि आप किसी कारण वश बारिश में भीग जाते है या फिर बारिश का लुत्फ़ उठाने के चक्कर में भीगते है तो तुरन साफ़ पानी में एंटीसेप्टिक दाल कर नहाना न भूले।

स्किन को रखे ड्राई :

अक्सर बारिश में उमस रहने के कारण पसीना बहुत आता है। पसीने से बचने के लिए हम बार-बार नहाते है। दिन में दो बार नहाना ठीक है मगर जहा तक संभव हो आप अपनी स्किन को ड्राई रखने का प्रयास करें। गीली स्किन में इन्फेक्शन हों की आशंकाएं अधिक रहती है।

सहीं कपड़ों का चुनाव :

ट्रेवल करते समय ऐसे कपडे पहने जोकि आरामदेह हो। साथ ही यदि आपके कपडे थोड़े बहुत नम हो तो तुरंत सूख भी जाएँ। एक बात का ध्यान दे कि गिले कपडे बिलकुल न पहने। यह स्किन रशेस या अन्य इन्फेक्शन को जन्म देते है।

हवादार सैंडल को अपनाएं: 

जब भी घूमने निकले हमेशा हवादार और आरामदायक सैंडल का चुनाव करें। इसे आपके पैरों को आराम मिलेगा और यदि आपके पैर भीगते है तो हवा में जल्दी सूखेंगे भी। अगर आप ऐसी जगह पर जा रहें है जहा पानी बहुत जयादा है तो गमबूट्स का प्रयोग करें। जयादा देर अपनी में रहने या भीगे रहने के कारण  फंगल इन्फेक्शन हो सकते है।

वेट टिसू का करें प्रयोग: 

ट्रेवल करते समय अपनी स्किन की चिपचिपाहट दूर अकरने के लिए वेट टिसू  का प्रयोग करें साथ ही हर बार नहाने के बाद एंटीसेप्टिक पाउडर का भी प्रयोग करें।

अन्य बातें:

  • अपने बालों को नियमित रूप से शैम्पू से धोएं। 
  • जहा तक संभव हो ट्रेवल के दौरान अपनी स्किन पर मेकअप न करें। यदि जरुरी हो तो वाटर प्रूफ मेकअप को ही अपनाएं। 
  • पैरों की सफाई पर विशेष ध्यान दे। 
  • अपनी स्किन को बारिश के पानी के अलावा धूप  स बचने के लिए सनस्क्रीन का भी प्रयोग करना न भूले। 
हमें उम्मीद है की आप बारिश के इस मौसम में भी अपनी स्किन को सुरक्षित करने में सफल रहेंगे।