मंगलवार, 12 जून 2012

गर्मी में बचें लू से

मंगलवार, 5 जून 2012

महिलाएं, किस उम्र में क्या खाएं










कुछ दिनों पहले अभिनेत्री और राज्य सभा सदस्य हेमामालिनी से हुई, मुलाकात में उनकी फिटनेस का राज पूछा, तो उन्होंने बताया में अपने शरीर की माग के अनुसार भोजन करती हूं। क्योकि इस उम्र में डायजेस्टिव सिस्टम थोड़ा कमजोर हो जाता है।
आपने भी महसूस किया होगा, उम्र बढ़ने के साथ-साथ आपके शरीर की जरूरतें बदलने लगती हैं। मगर आप इस ओर ध्यान नहीं दे पातीं, ऐसे में आपको कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो आईए जाने कैसे आप अपने आप को हर उम्र और हर समय फिट रख पायेंगी।

20 की उम्र
इस उम्र में कैल्शियम की मात्रा भरपूर लीजिए, ताकि आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस की शिकायत न आए। इसके लिए नॉन फैट या लो फैट मिल्क या चीज अधिक से अधिक खाएं। गायनेकॉलजिस्ट डॉ. सभ्यता गुप्ता मेदांता दा मेंडिसिटी अस्पताल गुड़गाॅव बताती हैं, 20 की उम्र के आसपास शरीर को मां बनने के लिए तैयार होना पड़ता है। इसलिए इस दौरान तकरीबन 400 माइक्रोग्राम फॉलिक एसिड हर रोज लेना जरूरी है। फॉलिक एसिड एसेंशियल विटामिन डी है, जो भ्रूण को सेफ रखता है। हरी पत्तीदार सब्जियां, फल और फॉलिक एसिड युक्त सीरियल्स खाकर इसकी कमी पूरी की जा सकती है।

30 की उम्र में बदलाव
हर 10 साल में औरतों में मेटाबॉलिज्म रेट 2 से 8 पर्सेंट कम हो जाता है। इसका मतलब है कि 25 की उम्र में आपको जितनी कैलरी चाहिए थी, 35 की उम्र में उससे 100 कैलरी कम चाहिए होगी। फिटनेस ट्रेनर संजय मेहरा कहते हैं, वेट बैलेंस बनाए रखने के लिए आपको ज्यादा एक्सरसाइज करनी होगी। ज्यादा नहीं कर पा रही हैं, तो ब्रिस्क वाकिंग कीजिए। जॉगिंग करना भी फायदेमंद रहेगा। इस दौरान आपको अपनी डाइट में कैलरी कम करनी होगी और न्यूट्रीशियस प्रॉडक्ट्स ज्यादा शामिल करने होंगे। मीठा खाने का मन करे, तो फल खाइए। इस उम्र में चॉकलेट खाना भी अवॉइड कीजिए।

40 का फंडा
इस पड़ाव तक पहुंचने पर मशल्स लॉस होने लगती है और उसकी जगह वेट बढ़ने लगता है। इसके लिए आपको स्विमिंग, वॉकिंग और डांस करने की जरूरत है। हां, अगर आप ज्यादा ओवरेवेट हैं या किसी तरह की मेडिकल प्रॉब्लम है, तो एक्सरसाइज करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें। पार्टी और रेस्तरां के खाने से बचना शुरू कीजिए और होममेड फूड से भूख बुझाइए। लंच और डिनर के साथ ताजा सलाद और सूप लेना न भूलिए। इससे आप खाने की मात्रा कम लेंगे। ताजे फलों के साथ स्टीम्ड, ग्रिल्ड या रॉ वेजीटेबल्स को डाइट में शामिल कर लीजिए। प्रोटीन के लिए चिकन लें। वेजीटेरियन हैं, तो सोया या टोफू ले सकती हैं। इसके अलावा, कार्बोहाइड्रेट में होल . व्हीट पास्ता, ब्राउन राइस, मल्टीग्रेन ब्रेड को अपनी डाइट में शामिल कीजिए। योगर्ट को अपने भोजन का हिस्सा जरूर बनाएं। इसमें हेल्दी बैक्टीरिया होते हैं और इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कैल्शियम की मात्रा कितनी ले रही हैं, इसका ध्यान भी इस उम्र में जरूर रखें।

50 उम्र का स्लो मेंटाबोलिज्म
ये उम्र ऐसी होती जिसमें आपको अपने शरीर के अनुसार बहुत अधिक बदलाव करने पड़ते हैं। इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते आपका मेटाबोलिज्म बहुत स्लो हो जाता है। तो ऐसे में आपको अपनी डाईट की ओर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे में हैवी डाइट से बचना जरूरी है। लेकिन थोड़े-थोडे़ अंतराल पर खाते रहिए। ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के अलावा दो बार स्नैक्स भी ले सकती हैं। हां, इसका भी ध्यान रखें कि स्नैक्स हेल्दी हों। फाइबर आपके आहार में होना बेहद जरूरी है। मैदे से दूरी बनाकर चलें। अगर आपने इस उम्र में योगा करना शुरू कर दिया, तो सोने पे सुहागा ।
अगर आप स्टोरी में बताई गई बातों को अपनायेंगी तो आप आपने आप को हर उम्र में फिट और तरोताजा बनाये रखेंगी।

करें रिलेशनशिप में इन्वेस्ट










अगर आपके रिश्ते भावनात्मक रूप से मजबूत है तो समझ लीजिए कि आपसे अधिक सुखी और कोई नहीं है। यह बात शोधों से भी साबित हो चुकी है। पर आज की व्यस्त जीवनशैली से पति-पत्नी के रिश्तों में रूखापन आता जा रहा है। आइये जानें कैसे करें रिश्तों में इन्वेस्टमेंट।

शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि जिन कपल्स के रिश्ते अच्छे हैं, उनकी जिंदगी खुशनुमा और सफल होती है। यहां तक कि कैरियर में भी वे लगातार सफलता की सीढि़यां चढ़ते जाते हैं। पर मशीनी जिंदगी और लाइफस्टाइल मेंटेन करने की चाह ने पति-पत्नी के रिश्तों में आज रुखापन आता जा रहा है। ऐसे में रिश्ता बिगड़ते देर नहीं लगती और रिलेशनशिप का अकाउंट बैलेंस खत्म होने लगता है। पैसे की छोटी-छोटी बचत की तरह रिलेशनशिप में भी इन्वेस्ट कर आप उसके अकाउंट बैलेंस को मेंटेन रख सकते हैं। आइए आपको बताते हैं रिश्तों में इनवेस्टमेंट के कुछ उपाय।
कम्यूनिकेशन
रिलेशनशिप का पहला इनवेस्टमेंट ऑप्शन है कम्यूनिकेशन। यह इस बात पर आधारित होता है कि आप अपने साथी को कितने बेहतर ते हैं। अपने साथी के साथ बांडिंग सुदृढ़ करने के लिए बातें शेयर करना और उसकी बातें सुनना दोनों ही बहुत अहम होता है। इससे दोनों एक.दूसरे के साथ कम्फर्टेबल और फ्री महसूस करेंगे। शेयरिंग प्यार को बनाए रखती है। अगर कम्यूनिकेट करते समय किसी बात पर बहस हो भी जाए तो कुछ पल चुप रहकर उस पर डिस्कस करें और रिलैक्स रहें।

यौन संबंध
सेक्स को एवायड न करें। अगर आपस में किसी बात को लेकर बहस हो गई है या आप एक.दूसरे से बोलने को भी तैयार नहीं हैं तो भी सेक्स संबंधों के प्रति उदासीनता न बरतें। अक्सर कुछ लोग बात मनवाने के लिए सेक्स को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं, ऐसा करना सबसे बड़ी गलती होता है। सेक्स प्यार जताने का तरीका होने के साथ-साथ एक आवश्यकता भी है, जिसे नजरअंदाज करने का मतलब है संबंधों में दूरियां बढ़ाना। समय≤ पर अपने प्यार को एक्सप्रेस भी करते रहें।

शक न करें
अपने साथी पर विश्वास करना सीखें। बात-बात पर शक करना या एक.दूसरे की मिनट-मिनट की रिपोर्ट लेना रिश्तों में दूरियां बढ़ाता है। आपका साथी किसी और स्त्री या पुरुष से बात कर रहा है तो बेवजह शक न करके मन में उठने वाले संशय के बारे में अप्रत्यक्ष ढत्रष्ष्झ

ईमानदार रहें
यह एक प्रमुख इनवेस्टमेंट ऑप्शन है। पाटर्नर के प्रति हमेशा वफादार रहें। अगर आपसे कोई गलती हो गई हो तो पाटर्नर के साथ अपनी फीलिंग्स अवश्य शेयर करें। ऐसा करने पर हो सकता है आपसी मतभेद हो जाए पर यह इनवेस्टमेंट मतभेदों को जल्दी ही खत्म कर देगा।

सम्मान करें
पाटर्नर और उसकी फीलिंग्स का अगर सम्मान न किया जाए तो रिलेशनशिप में प्यार की गर्माहट को लंबे समय तक बकरार रख पाना संभव नहीं होता। आपस में प्यार होगा तो सम्मान भी होगा। समय बीतने के साथ-साथ टेक इट फॉर ग्रांटेड की स्थिति इतनी व्यापक हो जाती है कि पार्टनर के काम के लिए थैंक्यू या अपनी गलती के लिए सॉरी तक बोलने की भी जरूरत हम महसूस नहीं करते हैं। इस तरह साथी का सम्मान करना छोड़ हम अपने इनवेस्टमेंट को रिक्त करने लगते हैं।

जो कहें वह करें
जो कहते हैं वही हमेशा करें, इससे रिलेशनशिप में विश्वास निर्मित करने में मदद मिलेगी। आपके साथी का आप पर किया जाने वाला विश्वास रिलेशनशिप को मजबूत करेगा और तनाव की स्थिति पैदा नहीं होगी।

एक दूसारे को समय दें
याद कीजिए कि पिछली बार आप कब छुट्टियों पर गए थे। सिर्फ आप दोनों, एक साथ इस साल एडवांस में अपनी छुट्टियां साथ बिताने का प्लान बनाएं। साल में कम से कम एक बार किसी दूर.दराज के इलाके में साथ छुट्टियां बिताने का रिजॉल्यूशन बनाएं। एक साथ समय बिताने का ये सबसे अच्छा तरीका है। इस समय को ऐसे बितायें कि आप दोनो या फिर अपनों के अलावा और कोई घर आॅफिस की बात कम से कम यहां शामिल हो।
किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए दोनों ओर से समर्पण की जरूरत होती है। एक दूसरे का ध्यान रखने की जरूरत होती है। अगर आप स्टोरी में बतायीं गईं कुछ बातों को अपना लेंगे तो वाकई आप अपनी रिलेश्नशिप को उम्रभर के लिए बूस्ट कर पायें

हड्डियों और जोड़ों का दर्द










जैसे ही हमारे बुजुर्ग पचास साल की उम्र के करीब पहुंचते हैं, उन्हें हडिडयों और जोड़ों का दर्द परेशान करने लगता है। ऐसे में बुजुर्ग ना तो सीढि़यां चढ़ पाते और ना ज्यादा दूर तक बिना सहारे के चल-फिर पाते हैं। इसकी शुरुआत घुटनों में हल्के दर्द के साथ होती है। धीरे-धीरे यह दर्द हाथों की अंगुलियों के जोड़ों में भी आ जाता है। यह दर्द हिलने-डुलने से बढ़ता जाता है। तो आइए, हम बताते हैं आपको अपने एक्सपर्ट के साथ कि कैसे जोड़ों के दर्द से निजात पायी जा सकती है।

एलएलएम अस्पताल के हडडी रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनुराग जैन बताते हैं कि हड्डी और जोड़ों का दर्द बहुत तकलीफदेह हो सकता है। इनमें से कुछ समस्याओं के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है। अधिकांश समस्याएं दवाओं से ठीक हो जाती हैं। लेकिन जोड़ों का दर्द ऐसा होता है जो बुढ़ापे में पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन इसके साथ आप कुछ उपाय करके बिना परेशानी के अपना जीवन जी सकते हैं।

हड्डियों के दर्द का कारणः
हड्डियों का दर्द चोट या इन दूसरी परिस्थितियों के कारण होता है, जैसे-
बोन कैंसर वह कैंसर जो हड्डियों तक फैल चुका हो जिसे मेटास्टेटिक मैलिग्नेंसी कहते हैं।
हड्डियों को रक्त की आपूर्ति में अवरोध जैसा कि सिकल सेल एनीमिया में होता है।
हड्डियों में संक्रमण जिसे ऑस्टियोमायलिटिस कहा जाता है।
ल्यूकेमिया या रक्त कैंसर भीे दर्द का कारण बन सकता है।
हड्डियों में खनिज पदार्थों की कमी या ऑस्टियोपोरोसिस।
कैपेसिटी से अधिक श्रम करना।
जोड़ों के दर्द के कारणः
ज्वाइंट पेन या जोड़ों का दर्द चोट या इन अन्य कारणों से हो सकता है, जैसे-

अर्थराइटिस, ऑस्टियोअर्थाराइटिस, रयूमेटॉयडअर्थाराइटिस से जोड़ों में परेशानी हो जाती है।
ऑस्टियोकोंड्राइटिस की वजह से भी जोड़ों में दर्द होने लगता है।
सिकल सेल रोग या सिकल सेल एनीमिया भी जोड़ों में दर्द का कारण बन सकता है।
स्टेरॉयड ड्रग भी कुछ लोगों में परेशानी का कारण बन जाती हैं क्योंकि कभी-कभी ये बहुत अधिक मात्रा में ले ली जाती हैं जो नुकसानदायक होती हैं।
कार्टिलेज फटने की वजह से जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है क्योंकि घायल कार्टिलेज की वजह से चलने-फिरने पर दर्द महसूस होता है।
जोड़ों का संक्रमण भी जोड़ों के दर्द का कारण बन जाता है।
ट्यूमरः अगर किसी जोड़ की जगह टयूमर बन गया तो उससे चलने-फिरने में बहुत परेशानी होती है।
घिसा हुआ लिगामेंटः उम्र बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों का लिगामेंट घिस जाता है। जिससे सही तरीके से जोड़ काम नहीं कर पाते और दर्द महसूस होता है।
कार्टिलेज का घिसनाः उम्र के साथ ज्यादातर बुजुर्गों के घुटनों का कार्टिलेज घिस जाता है। इससे घुटने सही तरीके से काम नहीं कर पाते।

हड्डियों और जोड़ों के दर्द के लक्षण हैं.

चलने, खड़े होने, हिलने-डुलने और यहां तक कि आराम करते समय भी दर्द।
सूजन और क्रेपिटस।
चलने पर या गति करते समय जोड़ों का लॉक हो जाना।
जोड़ों का कड़ापन, खासकर सुबह में या यह पूरे दिन भी रह सकता है।
वेस्टिंग और फेसिकुलेशन।
अगर बुखार, थकान और वजन घटने जैसे लक्षण हों, तो कोई गंभीर अंदरूनी या संक्रामक बीमारी हो सकती है। ऐसे में आपको डॉक्टर से तुरंत बात करनी चाहिए।

जांच और रोग की पहचान
डॉ. अनुराग बताते हैं कि रोग की पहचान करने के लिए आपके चिकित्सकीय इतिहास के बारे में पूछा जाता है और शारीरिक जांच की जाती हैं। चिकित्सकीय इतिहास में दर्द की जगह, दर्द के समय, पैटर्न और किसी भी अन्य संबंधित तथ्य से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। इनमें से कोई एक, या अधिक जांच किये जा सकते हैं.

हड्डियों और जोड़ो का एक्स-रे, जिसमें हड्डियों का एक स्कैन शामिल है।
हड्डियों और जोड़ो का सीटी या एमआरआई स्कैन।
होर्मोन के स्तर का अध्ययन।
पिट्यूटरी और एड्रीनल ग्रंथि की कार्यक्षमता का अध्ययन।
यूरीन का अध्ययन

उपचार
जोड़ों के दर्द को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अगर आपकी समस्या उग्र या साधारण है, आप ओटीसी दर्दनिवारकों का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन अगर आपका दर्द लगातार बना हुआ है या किसी चोट या कटने या सर्जरी के बाद शुरू हुआ है, तो डॉक्टर से मिलें।

पोषक तत्वः
इससे बचने के लिए विशेषज्ञ अपने आहार में ऐसे फलों और सब्जियों को शामिल करने की सलाह देते हैं जिनमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेन्ट्स और पौष्टिक तत्व उचित मात्रा में मौजूद हों। कुछ खाद्य-पदार्थो का सेवन और कुछ बातों का ध्यान रखकर इस रोग पर काबू पाया जाया सकता है।

आराम करना और गर्म सेंक देनाः
साधारण चोट या मोच में आराम और गर्म सेंक के उपयोग से दर्द से राहत पाने में सहायता मिलती है।

व्यायामः
सामान्य हल्के व्यायाम अर्थाराइटिस या फाइब्रोमाइल्जिया के रोगियों में जोड़ों की गतिशीलता बढत्रष्ष् घआनेत्रष्ष् करतेत्रष्ष् कोत्रष्ष् कउ़ीत्रष्ष् मांसपेशियोंत्रष्ष् मददत्रष्ष् मेंत्रष्ष् मिलेंत्रष्ष् विदजत्रष्ष् हेंत्रष्ष् पहुंचानेत्रष्ष् पातेत्रष्ष् राहतत्रष्ष् सेत्रष्ष् उपायत्रष्ष् उॉकअरत्रष्ष् दद्रत्रष्ष् दुखतीत्रष्ष् देत्रष्ष् तोत्रष्ष् नहींत्रष्ष् आपकोत्रष्ष् आरामत्रष्ष् ओरत्रष्ष् अगरत्रष्ष्झ
इसके अलावा भी कुछ घरेलू उपचार हैं-
अदरक जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने के लिए बहुत कारगर है। रोजाना दो सौ ग्राम अदरक दो बार लेने से दर्द में बहुत राहत मिलती है।
फूलगोभी का रस पीते रहने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है।
जोड़ों पर नीबू के रस की मालिश करने से और रोजाना सुबह एक गिलास पानी में एक नीबू का रस निचोड़ कर पीते रहने से जोड़ों की सूजन दूर हो जाती है और दर्द नहीं रहता।
जोड़ों में दर्द के समय या बाद में गर्म पानी के टब में कसरत करें या गर्म पानी के शॉवर के नीचे बैठें। आपको निश्चित ही राहत मिलेगी।
दर्द घटाने के बाम, क्रीम आदि बार-बार इस्तेमाल न करें। इनके द्वारा पैदा हुई गर्मी से राहत तो मिलती है, पर धीरे-धीरे ये नुकसान पहुंचाते हैं।
कभी भी दर्द निवारक बाम लगाकर उस पर सेंक न करें। इससे जलन बहुत बढ़ सकती है।
जोड़ों के दर्द के लिए चमत्कारिक दवाएं तेल या मालिश वगैरह के दावे बहुत किए जाते हैं। इनको इस्तेमाल करने से पहले एक बार परख लें।

अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान है तो स्टोरी में बताई गई बातें आपको काफी हद तक लाभ पहुचायेंगी। तो आप इन बातों को अपनाकर काफी हद तक जोड़ों के दर्द से निजात पा सकते हैं।

जिन्दादिली और सही खान-पान से दें कैंसर को मात













आज क्रिकेटर युवराज सिंह का उदाहरण हम सबके सामने है। कैसे इस इंटरटेनिंग क्रिकेटर ने जांबाजी के साथ कैंसर से छूटकारा पाया। युवराज सिंह बताते हैं कि कैंसर से निपटने के लिये जागरूकता जरूरी है जिसका भारत में अभाव है। युवराज ने कहा कि मैने अमेरिका में 60-ंउचय65 साल के लोगों को आराम से कीमोथेरेपी कराते देखा। मैं उनसे प्रेरणा लेता था। लेकिन भारत में कैंसर को लेकर काफी डरा दिया जाता है जबकि ऐसा है नहीं। उन्होंने कहा कि मैने खुद को एक मिसाल के तौर पर सामने रखने की कोशिश की कि कैंसर से डरने की जरूरत नहीं है। यदि मैं इससे निपट सकता हूं तो कोई भी निपट सकता है।

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका मरीज के सामान्य स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पडता है। इतना ही नहीं, कैंसर के इलाज के चलते मरीज के आहार पर भी बुरा असर पडता है। इलाज पूरी तरह असरदार हो, इसके लिए जरूरी है कि आहार में कुछ सावधानियां बरती जाएं। कैंसर के रोगियों की डाइट उनके स्वास्थ्य के हिसाब से कैसी होनी चाहिए आइए जानें।

पोषण की कमी

कैंसर की बीमारी कई तरह से मरीज के आहार पर बुरा प्रभाव डालती है। आम तौर पर कैंसर के मरीजों की भूख मिट जाती है, यह सबसे सामान्य समस्या है। इसके परिणामस्वरूप आहार की मात्रा और आवश्यक पोषक पदार्थो जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और खनिज लवण की कमी शरीर में आ जाती है।

कैंसर के बहुत से मरीजों का आहार इसलिए भी कम हो जाता है, क्योंकि बीमारी उनके पाचन तंत्र के विभिन्न अंगों जैसे इसोफैगस, पेट, छोटी या बडी आंत, लीवर, गाल ब्लैडर और पैंक्रियाज को प्रभावित कर देती है।

कई मरीजों की आंत के अंदर रुकावट उत्पन्न होने से खाने के दौरान दर्द, मरोड़ और कभी-ंउचयकभी उल्टी की समस्या हो जाती है। मरीज का वजन घट जाता है। मांसपेशियों की मात्रा भी घट जाती है। इससे कमजोरी आ जाती है और मरीज बहुत जल्द थक जाता है। शारीरिक काम करने की क्षमता घट जाती है। घाव या जख्म भरने में अधिक समय लगता है और बीमारी से लडने की क्षमता या इम्युनिटी भी घट जाती है। ऐसे में कैंसर के मरीजों को संक्रमण का डर बना रहता है।

क्या खाएं

ऐसे मरीजों को पोषक आहार लेना चाहिए ताकि पोषण संबंधी जरूरतें पूरी हों। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आहार एक अच्छा उपाय है। हालांकि मधुमेह के रोगियों को इस मामले में सतर्क रहना चाहिए। कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार लेने के बाद तुरंत ऊर्जा मिलती है और पाचन सही होता है। कम मात्रा में अधिक बार आहार शरीर को लगातार ऊर्जा देने का अच्छा तरीका है।

प्रोटीन

मांसपेशियों के विकास और काम के लिए ऊर्जा प्राप्त करने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है। इसके अलावा घाव भरने, बीमारी से लड़ने और खून का थक्का जमने जैसी विभिन्न शारीरिक क्रियाओं के लिए भी प्रोटीन अनिवार्य है। अंडा, मीट, मसूर की दाल, मटर, बींस, सोया और नट्स आदि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।

विटमिंस व मिनरल्स

ऐसे मरीजों में विटमिंस और मिनरल्स की कमी आम समस्या है, क्योंकि इन दोनों तत्वों की मांग अधिक और आपूर्ति कम होती है। इसलिए उचित आहार के साथ बेहतर पोषण के लिए विटमिन और मिनरल की अतिरिक्त खुराक जरूरी है। जो चिकित्सक के परामर्श से ली जा सकती है।

तरल पदार्थ

कैंसर के मरीजों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करना जरूरी है। इससे डीहाइड्रेशन का डर नहीं रहता है और उनके संपूर्ण स्वास्थ्य की स्थिति बेहतर होती है। अधिक तरल पदार्थ लेने से उचित मात्रा में यूरिन निकलता है और शरीर से विषैले पदार्थ भी निकल जाते हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि आसानी से पचने वाले आहार लें। तला-ंउचयभुना, बहुत मसालेदार या फिर अधिक ठोस आहार न लें। कम मात्रा में अधिक बार खाने से पाचन आसान हो जाता है और पेट भी भारी नहीं लगता। इससे मितली या उल्टी का डर भी कम हो जाता है।

कीमोथेरेपी के मरीज

कैंसर के मरीजों के लिए कीमोथेरेपी एक आम उपचार है, जो चार से छह महीने तक चलता है। इस दौरान आहार संबंधी कई महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले तो यह कि कीमोथेरेपी के पहले दिन और उससे एक.दो दिन बाद तक भूख कम लगती है। मितली और कई बार उल्टी भी आती है। उल्टी से बचने की दवाइयां दी जाती हैं। इस अवधि में आहार में अधिक मात्रा में ऐसे तरल और नर्म खाद्य पदार्थो का सेवन करना चाहिए जिनसे एनर्जी तुरंत मिल जाए और इसके बाद मरीज को सामान्य ठोस आहार या आधा ठोस आहार लेना चाहिए।

कीमोथेरेपी वाले रोगियों को दैनिक आहार लेने का मन नहीं करता या उन्हें खाना बेस्वाद लगता है। खाने की सुगंध बदलकर या वैकल्पिक आहार देकर इस समस्या का समाधान संभव है।

कीमोथेरेपी से शरीर के भीतर श्वेत रक्त कोशिकाओं या डब्ल्यूबीसी की संख्या घट सकती है। इससे संक्रमण का खतरा ब-सजय जाता है। इसलिए कैंसर के मरीज को स्वस्थ आहार लेना चाहिए। इन्हें घर से बाहर नहीं खाना चाहिए।

घर पर भी ताजा पका खाना बेहतर होता है। कच्चा, बासी और स्टोर्ड फूड से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे संक्रमण का अधिक खतरा रहता है। उपचार के इस चरण में ताजा फलों के जूस से भी परहेज करना चाहिए। फल-ंउचयसब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाना चाहिए। दूध हमेशा उबाल कर पीना चाहिए।

रेडियोथेरेपी के मरीज

चेहरे और गर्दन की रेडियोथेरपी कराने वालों में सेंसिटिविटी और अल्सरेशन या फोडे का खतरा रहता है। जिसके कारण निगलने में दिक्कत होती है। इसलिए ऐसे लोगों को लिक्विड और लाइट डाइट लेने की सलाह दी जाती है। इन्हें तले-ंउचयभुने, मसालेदार और गर्म खाद्य पदार्थो से परहेज करना चाहिए। यदि बहुत दर्द हो तो नियमित रूप से दर्द दूर करने की दवा ली जा सकती है। इससे दर्द बेकाबू नहीं होता।

ऐसे मरीज के मुंह का स्वाद खराब होने और मुंह के अंदर सूखेपन की शिकायत भी कर सकते हैं। रेडियोथेरेपी के दौरान और उसके बाद भी उनके लिए सादा, नर्म आहार और पूरक के तौर पर पर्याप्त तरल पदार्थ लेना अच्छा रहता है।

धूम्रपान और मद्यपान से मुंह-ंउचयगले के अंदर म्यूकोसाइटिस की समस्या ब-सजय जाती है। इसलिए रेडिएशन के दौरान ये बिलकुल वर्जित हैं। पेट के निचले भाग की रेडियोथेरेपी कराने वाले मरीजों में पेट खराब होने की शिकायत हो सकती है। उन्हें दही, चावल, कम फाइबर वाले आहार और साथ ही प्रो बायोटिक सप्लीमेंट लेने से लाभ मिल सकता है।

सर्जरी के मरीज

सर्जरी के बाद मरीज को अधिक कैलरी, प्रोटीन, विटमिंस और मिनरल्स चाहिए ताकि जख्म जल्दी भर सकें। सर्जरी के बाद जितनी जल्दी संभव हो मुंह से आहार देना शुरू कर दिया जाता है। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपूर आहार और साथ ही मिनरल्स एवं विटमिन ऐसे मरीजों के लिए वरदान होता है।

फीडिंग ट्यूब से आहार

कैंसर के बहुत से मरीजों को फीडिंग ट्यूब से आहार दिया जाता है, क्योंकि वे सामान्य रूप से आहार नहीं ले सकते हैं। यह ट्यूब नाक के जरिये या फिर सीधे पेट में डाला जाता है। ट्यूब से केवल तरल आहार दिया जाता है। ट्यूब के आकार के अनुसार भी आहार तय किए जाते हैं। ट्यूब छोटा हो तो बहुत पतला तरल आहार दिया जाता है, लंबा और उसकी सूराख मोटी हो तो कुछ मोटा तरल आहार भी दे सकते हैं।

ऐसे मरीजों के लिए एक अच्छा रास्ता यह है कि घर पर तैयार खाने को मिक्सर ग्राइंडर में पीस कर और छान कर दिया जाए, ताकि उसमें ठोस भाग न रह जाए। पूरक आहार के पाउडर भी ट्यूब के जरिये दिए जा सकते हैं।

चूंकि बहुत से मरीज आम तौर पर पर्याप्त आहार लेने में असमर्थ होते हैं, इसलिए पूरक आहार की अहमियत ब-सजय जाती है। इस तरह उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है। ऐसे बहुत से पूरक आहार हैं जिनसे कैलरी, प्रोटीन, विटमिन और मिनरल्स मिलते हैं। कुछ सप्लीमेंट तो खास तौर पर प्रोटीन से भरपूर होते हैं।

पाउडर सप्लीमेंट को दूध में मिलाकर या फिर पानी के साथ ट्यूब के जरिये दिया जा सकता है। तरह-ंउचयतरह के स्वाद में उपलब्ध ये सप्लीमेंट मरीजों को मनपसंद चुनने का विकल्प देते हैं।

जैसा कि युवराज सिंह बताते है कि सभी दवाईयों और डाॅक्टरों के साथ खुद का पाॅजीटिव नजरिया बहुत मायने रखता है। अगर आप ये मानकर चलते है कि में इस बीमारी से लड़ सकता हूं तो वाकई आप इस पाॅजीटिव माइंड के साथ स्टोरी में बताई गई बातों को अपनाकर कैंसर को हंसते हुए मात दे सकते हैं।