सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

बदलते मौसम में बाल संवारें सेहत:
राजेश राना:

अपने लुक और पर्सनैलिटी में चार चांद लगाने के लिए हम आजकल बालों के साथ तरह-तरह के प्रयोग करते रहते हैं। इससे कई समस्याएं भी सामने आती हैं, जिसमें बालों के झड़ने से लेकर सफेद होने तक की समस्याएं शामिल हैं। अब तो दिल्ली का मौसम भी रोज-रोज रंग बदलने लगा है। ऐसे में बालों का कैसे खयाल रखें | दिल्ली का युवा वर्ग लेटेस्ट फैशन, नए-नए ट्रेंड और स्टाइल को अपनाने के लिए जाना जाता है। मेट्रो सिटीज खासकर देश की राजधानी दिल्ली के युवा नई चीजों को ट्राई करने, मेकओवर करने, नया लुक अपनाने और नए-नए हेयर स्टाइल अपनाने में भी पीछे नहीं हैं। यही कारण है कि दिल्ली और मेट्रो सिटीज का युवा वर्ग एक ओर जहां अपनी इस जीवनशैली के लिए मशहूर है, वहीं वे नई-नई समस्याओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित होने के लिए भी जाने जाते हैं। दिल्ली के 80 फीसदी युवा बालों से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे हैं, क्योंकि वे बदलाव को सबसे अधिक पसंद करते हैं।
बालों की समस्या और कारण:
दिल्ली में खासकर लड़कियों में बालों से जुड़ी समस्याओं के चार मुख्य कारण हैं।

बालों की उचित साफ-सफाई न रखना या फिर लापरवाही बरतना।
किन्हीं कारणों से ट्रॉमा या तनाव में रहना।
बालों में किसी तरह का इंफेक्शन होना।
दवाओं के साइड इफेक्ट। इन कारणों से बालों में डेंड्रफ, खुजली, बालों के झड़ने, गंजेपन और बालों में रूखापन या स्कॉल्प के शुष्क होने की समस्या होती है। राजधानी के अधिकांश युवा और खासकर लड़कियां इन समस्याओं से गुजर रही हैं।
अन्य कारण:

खासतौर पर दिल्ली में इन बीमारियों के कुछ अन्य ठोस कारण भी हैं। प्रदूषण, व्यस्त जीवनशैली, काम के बोझ के कारण तनाव, बालों की देखभाल के लिए समय की कमी, मौसम का उतार-चढ़ाव, नए-नए हेयर प्रोडक्ट्स अपनाना और उनमें बार-बार बदलाव करना, बार-बार बालों को रंगना, नए-नए हेयर स्टाइल अपनाना, पौष्टिक खाने की कमी, जंकफूड से दोस्ती और कुछ गंभीर बीमारियां या हार्मोंस का संतुलन बिगड़ना भी बालों की समस्या के कारण हो सकते हैं। आप चाहते हैं कि आपके स्कॉल्प (सिर की त्वचा) और बालों को नुकसान ना पहुंचे, तो आपको समय रहते बालों की समस्याओं को पहचानना होगा और इनका समय पर उपचार करवाना चाहिए। बालों को लगातार पोषक तत्व दें और बालों पर इस्तेमाल किए जाने वाले हेयर प्रोडक्ट्स के प्रति सावधान रहें।
संतुलित आहार और स्कॉल्प की देखभाल कर इन समस्याओं से बच सकते हैं।
कुछ सामान्य समस्याएं:

बालों का टूटना या बाल के कई टुकड़े होना।
दोमुंहे बाल होना
उनका समय से पहले सफेद होना
चिपचिपापन- ऑयली होना
रूसी या डेंड्रफ होना
फंगस, दाने, एलर्जी या संक्रमण होना।
बालों का सीधा ना होना या घुंघराले होना।
ऐसे बचें:
बालों को पोषक तत्व देने के लिए बाल धोने से पहले तेल से मालिश करनी चाहिए। सप्ताह में एक बार बालों की अच्छी तरह मसाज या चंपी करवानी होगी।
दिनभर में कम से कम 3 लीटर पानी पीएं। साथ ही कम से कम आठ घंटे की नींद पूरी करें।
चाहें तो महीने में एक बार बालों में दही, अंडा या फिर दही, नींबू, मेहंदी आदि का इस्तेमाल करें।
बालों में बार-बार कंघी करने के बजाय दो-तीन बार कंघी करें।
दूसरों की कंघी, तौलिया, हेयर प्रोड्क्ट्स का इस्तेमाल न करें।
लोकल हेयर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल न करें और हर्बल हेयर प्रोडक्ट्स को महत्व दें।
बालों को स्वस्थ और हेल्दी बनाने के लिए व्यायाम, योग और मेडीटेशन भी जरूरी है।
महीने में एक बार हेयर स्पा भी ले सकते हैं। नियमित व्यायाम भी आपके लिए बहुत जरूरी है।
बालों को गर्म पानी से न धोएं और बालों में हेयर ड्रायर इस्तेमाल न करें।
बालों की समय-समय पर कंडीशनिंग करते रहें।
सप्ताह में दो-तीन बार बालों को जरूर धोएं।
ताजे फल, हरी सब्जियां आदि लें। विटामिन ई युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करें।
दोमुंहे बालों को कभी-कभी कटवाते रहें।
बार-बार हेयर स्टाइल में बदलाव न लाएं, इससे बालों पर लगने वाले केमिकल बालों को नुकसान पहुंचाते हैं।
धूल-मिट्टी, प्रदूषण और तेज धूप से बचाने के लिए बालों को कवर करके घर से निकलें।
घरेलू नुस्खें:
आंवला और अंगूर के रस का सेवन।
दूध, बादाम, मछली का सेवन।
बालों पर कसूरी मेथी का पेस्ट लगाएं।
बालों पर आंवला, रीठा और शिकाकाई का पेस्ट लगाएं।
पपीते के जूस को बालों पर लगाएं।
बालों को रंगने से पहले सावधानियां:
एलर्जी होने पर बाल कलर ना करें।
अमोनियायुक्त डाई का इस्तेमाल करने के बजाय प्रोटीनयुक्त डाई का इस्तेमाल करें।
बालों को धोने के बाद सुखाकर कलर करें।
पहली बार बाल कलर करने से पहले हेयर एक्सपर्ट की सलाह लें।
बालों को रंगने वाला कलर अच्छी क्वालिटी का ही इस्तेमाल करें।
बालों को रंगने से पहले या बाद में 15-20 दिन तक बालों पर कोई प्रयोग ना करें।
क्या आप जानते हैं:

सिर के एक बाल की उम्र 1 से 6 साल तक के बीच होती है।
बाल टूटने के बाद उसी जगह दोबारा बाल उग आता है।
एक स्वस्थ बाल आधे इंच से तीन चौथाई इंज प्रतिमाह बढ़ता है।
जैसे- जैसे खोपड़ी की त्वचा कमजोर और ढीली पड़ने लगती है, वैसे-वैसे बालों के टूटने और गिरने की प्रक्रिया में तेजी आ जाती है।
बालों के लुक के साथ छेड़छाड़ न करें:
बालों की प्राकृतिक चमक बनाए रखने के लिए बालों को हर दूसरे दिन धोएं।
बालों पर कभी भी हेयर ड्रायर, प्रेसिंग या फिर किसी गर्म चीज का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे बाल खराब होते हैं।
आप चाहें तो अपने शैंपू को सूट ना करने पर बदल सकते हैं, लेकिन बालों की चमक बरकरार रखने के लिए आपको अच्छी क्वालिटी के कंडीशनर का इस्तेमाल करना चाहिए।
बालों का लुक जैसा है वैसा ही रहने दें। उन पर बहुत अधिक एक्सपेरिमेंट ना करें। यदि बाल स्ट्रेट हैं तो उन्हें स्ट्रेट ही रहने दें ना कि घुंघराले करवाएं। इसी तरह घुंघराले बालों को स्ट्रेट ना करवाएं, इससे आपके बालों को नुकसान पहुंच सकता है।
नियमित साफ सफाई है जरूरी:

बालों की नियमित देखभाल करें। आप समय-समय पर बाल कटवाते रहें, ताकि दोमुंहे बालों की समस्या से बच सकें।
नियमित रूप से बालों की साफ-सफाई करनी चाहिए। जब भी बाल धोएं, बालों की कंडीशनिंग भी करें, जिससे आपके बाल सिल्की और चमकदार बन सकें।
स्टाइलिश दिखने के लिए बालों पर नए-नए एक्सपेरिमेंट के बदले खुद से ही हेयर स्टाइल्स में बदलाव लाएं।
सेहत बनानी है तो प्यार बढायें
राजेश राना
प्यार के मोसम यानि बसंत स्पेशल पर स्टोरी

फरवरी यानी प्यार का महीना। फिजाओं में प्यार, खुशी और खूबसूरती के रंग। प्यार की अवस्था में डोपामिन, नॉर-एपिनेफ्रिन तथा फिनाइल इथाइल एमिन हारमोंस आपके मन को उल्लास से भर देते हैं। किस तरह इन हार्मोन का लोचा आपको खुशियों से भर देता हैं, बता रही हैं रॉकलैंड अस्पताल की सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रेमलता तिवारी प्यार की तासीर ऐसी ही होती है। जब आप प्यार में होते हैं तो आपके शरीर में कई तरह के हार्मोस बनते हैं जिसका जादुई प्राकृतिक नशा आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब आप भावुक होते हैं तो शरीर में कैमिकल्स का उतार-चढ़ाव भी बढ़ जाता है और हार्मोस का सीक्रेशन होता है। इससे शारीरिक क्रियाएं प्रभावित होती हैं। सांसें और हृदयगति तेज हो जाती है। प्यार की अवस्था में डोपामिन, नॉर-एपिनेफ्रिन तथा फिनाइल इथाइल एमिन नामक हारमोंस रक्त में शामिल होते हैं। डोपामिन को आनंद का रसायन भी कहा जाता है, क्योंकि ये परम सुख की भावना उत्पन्न करता है। डोपामिन और नॉर-एपिनेफ्रिन आपके मन को उल्लास से भर देते हैं। इन्हीं हारमोंस से इंसान को प्यार में ऊर्जा मिलती है। इसके अतिरिक्त डोपामिन एक अन्य महत्वपूर्ण हार्मोन ऑक्सीटोसीन के स्नव को भी उत्तेजित करता है जो इंसान में आत्मविश्वास बढ़ाता है। इसे लाड़ का रसायन भी कहा जाता है। प्यार में फायदे
विशेषज्ञों की मानें, तो अगर आप किसी के प्यार में होते हैं तो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी बनी रहती है, क्योंकि जब आप किसी के साथ रिलेशनशिप में होते हैं तो आपका शरीर फील गुड हार्मोस रिलीज करता है। इसके कारण आपका मूड अच्छा रहता है और आप बीमारियों से दूर रहते हैं। तनाव कम होता है
इस स्थिति में आप ज्यादा कूल और पॉजिटिव होते हैं। इससे आपको तनाव कम होता है और आप डिप्रेशन से दूर रहते हैं। प्यार का सही डोज महिलाओं को सुरक्षित बनाता है। दर्द बेअसर
जब आप किसी के सच्चे प्यार या अच्छी रिलेशनशिप में होते हैं तो आपके अंदर विश्वास की भावना तेजी से बढ़ती है। फीलिंग्स को शेयर करने की भावना आती है। इसलिए बेहतर रिलेशनशिप आपको दर्द से लड़ने की हिम्मत देती है। बढ़ती है रचनात्मकता
रिलेशनशिप से खुश होते हैं तो आपकी परफॉर्मेस भी अच्छी होती है और आप क्रिएटिविटी भी दिखा पाते हैं। तनाव रहेगा दूर
मजबूत संबंध में लड़ाई नहीं होती, क्योंकि आप समस्याओं का हल लड़कर नहीं, बल्कि बातचीत करके निकालते हैं। किसी का सपोर्ट मुश्किलों से लड़ने की ताकत देता है। आप रक्तचाप, माइग्रेन आदि से दूर रहते हैं। क्या कहते हैं कार्डियोलॉजिस्ट
आप अच्छी तरह जानते हैं कि रिलेशनशिप के दौरान आप का एटीट्यूड कितना पॉजिटिव होता है। आप खुद में एक सहजता पाते हैं। इससे आपके शरीर में रक्त का संचार भी ठीक रहता है। खुशी की वजह से तनाव जैसी समस्या भी नहीं होती। जब आपका रक्त संचार ठीक होता है तो आपको ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम भी नहीं होती। सेहत के लिए भी नगीना, फरवरी का महीना
डॉ़ अरूणा ब्रूटा, मनोचिकित्सक
कड़क की सर्दी के बाद जब वसंत ऋतु का आगमन होता है तो मौसम खुलने लगता है। इस फरवरी के महीने में ही सबसे ज्यादा फूलों की उपज होती है। जहां देखो चारों ओर, बागों में, फिजाओं में, सब जगह रंग ही रंग होते हैं। वातावरण सुरीला, संगीतमय और खुशनुमा है। ऐसे में वेलेंटाइन डे आपके व्यवहार में चार चांद लगा देता है। आप खुद को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त कर पाते हैं। आपका दिल खुद-ब-खुद बाहर निकलने को मचलने लगता है। आप सैर करना, व्यायाम करना शुरू कर देते हैं जो स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा होता है। फरवरी का ये महीना सिर्फ रोमांस और प्यार के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहतरीन माना जाता है, क्योंकि इस महीने में फलों की भरमार देखने को मिलेगी। कीनू, संतरा, अंगूर, सेब, अनार, केले, पपीता सब आपको इस महीने में आराम से उपलब्ध हो जाते हैं। जब हम अच्छा खाते हैं तो हमारे विचार भी अच्छे हो जाते हैं। शोध कहता है कि इस महीने में ईर्ष्या, जलन, तेरा-मेरा और चुगली जैसी भावनाएं खुद-ब-खुद कम हो जाती हैं। जब आप प्यार में होते हैं तो सेहत, नियमितता और अनुशासन की भावना आपमें खुद ही आ जाती है।

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

निजी बनते प्रोफेशनल रिश्ते


निजी बनते प्रोफेशनल रिश्ते आपको क्या पसंद है और क्या नापसंद, आपकी आदतें, आपकी कमजोरियां और आपके गहरे राजों को बखूबी समझने वाला अगर कोई व्यक्ति आपके साथ ज्यादा से ज्यादा समय गुजारे तो नजदीकियां आना स्वाभाविक है। कुछ ऐसे ही होते हैं ऑफिस स्पाउस। ऑफिस के ड्यूटी ऑवर्स के दौरान किसी खास से कुछ ऐसी केमिस्ट्री बन जाती है कि काम करने में और भी ज्यादा मन लगता है।

लांग वर्किग ऑवर्स आजकल लगभग हर प्रोफेशन का हिस्सा बनते जा रहे हैं और साथ ही बढते जा रहे हैं प्रोफेशनल रिश्तों के दायरे। ऑफिस की चहारदीवारी में पनपते हैं निजी रिश्ते। एक सर्वे के अनुसार एक ही ऑफिस में काम करने वाले स्त्री-पुरुष कई बार इतने करीब हो जाते हैं कि उनमें पति-पत्नी जैसा संबंध विकसित होने लगता है। ऐसे रिश्तों में पार्टनर्स को ऑफिस स्पाउस कहते हैं। हिंदी फिल्मों में इस कॉन्सेप्ट को बखूबी प्रयोग किया गया है। अब्बास-मस्तान की फिल्म रेस में कट्रीना कैफ और सैफ अली खान व अनिल कपूर और समीरा रेड्डी के बीच भी ऐसा ही रिश्ता दिखाया गया है।


क्या होते हैं ऑफिस स्पाउस?


अगर आप भी अपने ऑफिस में विपरीत सेक्स के किसी व्यक्ति पर बेहद भरोसा करते हों, उनसे अपने सबसे खास राज शेयर करते हों, उनके साथ हंसी-मजाक करते हों या उनके बिना आपका ऑफिस का जीवन ठहर सा जाए तो समझिए कि आपके पास भी एक ऑफिस स्पाउस है। ऑफिस के 12-14 घंटों के वर्क प्रेशर के बीच अगर कोई आपके लिए एक शॉक-एब्जॉर्बर का काम करता है। भावनात्मक सहयोग देने के साथ वह आपकी केयर करता है और विपरीत सेक्स का है तो उसके प्रति आकर्षण पनपना स्वाभाविक है। सर्वे की मानें तो ऑफिस स्पाउसेज की संख्या दिनोदिन बढती जा रही है। आंकडों के मुताबिक तो लगभग 32 प्रतिशत कामकाजी लोग ऑफिस स्पाउस की बात मानते हैं। वे मानते हैं कि ऑफिस में उनका अपोजिट सेक्स के व्यक्ति के प्रति आकर्षण है। वे मानते हैं कि ऑफिस में उनका एक खास रिश्ता है जो उनके निजी जीवन के इतर उनके जीवन में बेहद अहम जगह रखता है। ऐसे रिश्तों में डेटिंग, हल्का-फुल्का फ्लर्ट और कुछ हद तक सेक्स भी जगह बना लेता है। लेकिन मनोवैज्ञानिक इस कॉन्सेप्ट से उतना इत्तेफाक नहीं रखते जितनी तेजी से ऑफिस स्पाउस टर्म का प्रयोग प्रचलन में आ रहा है।

मनोवैज्ञानिक समीर पारेख कहते हैं, ऑफिस स्पाउस शब्द का प्रयोग अपने आपमें गलत है। स्पाउस शब्द का संबंध कमिटमेंट से होता है। गौरतलब है कि यहां हम वर्कप्लेस अफेयर की बात नहीं कर रहे। वर्कप्लेस अफेयर और ऑफिस स्पाउस में बेसिक फर्क होता है कि वर्कप्लेस अफेयर आकर्षण के आधार पर होते हैं, जबकि ऑफिस स्पाउस रिलेशंस दो लोगों के बीच की केमिस्ट्री से बनते हैं।


ऑफिस स्पाउस का निजी जीवन पर असर


हिंदी फिल्मों के वे सीन बेहद आम हुआ करते थे जब बॉस की अपनी सेक्रेटरी के साथ नजदीकियां इतनी बढ़ जाती थीं कि ऑफिस का रिश्ता बेडरूम तक चला आता था। जाहिर है, ऐसे रिश्तों से पारिवारिक माहौल पर बुरा असर भी पड़ता था। करियर बिल्डर डॉट कॉम द्वारा कराए गए एक सर्वे के अनुसार 20 प्रतिशत गृहस्थियों में ऑफिस स्पाउस के होने से उलझनें पैदा हो जाती हैं। ऑफिस स्पाउस के साथ नजदीकियां कई बार इतनी बढ़ जाती हैं कि आपके रियल लाइफ पार्टनर के साथ आपकी ट्यूनिंग फीकी पड़ सकती है। ऐसी स्थितियों का घर तोड़ने में बडा़ हाथ होता है।

मनोवैज्ञानिकों की मानें तो रिश्तों में दायरे बनाने की जरूरत यहीं पडती है। समीर कहते हैं, साथ में ज्यादा समय बिताने से दो लोगों में नजदीकियां आना स्वाभाविक है, लेकिन उन करीबियों को ऑफिस के चहारदीवारी तक सीमित रखना व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है। अपने रिश्ते को काम तक सीमित रखना बेहद जरूरी है। यानी संतुलित जीवन के लिए दायरे बनाना बेहद जरूरी है।


करियर के लिए भी खतरनाक


ऑफिस स्पाउस होने से आपको मानसिक सुकून और क्रिएटिव स्पेस तो मिलती है लेकिन इससे आपके करियर पर बुरा असर भी पड सकता है।
1. संभव है कि आपके दूसरे कलीग्स आपके और आपके ऑफिस स्पाउस के रिश्ते के मामले में उतने सहज न हों और आपके काम में नुकसान पहुंचाने की कोशिश करें।
2. रिश्ते की निजता काम पर अकसर दिख ही जाती है जिसका आपके परफॉर्मेस पर बुरा असर भी पड सकता है।
3. अगर आप अपने स्पाउस को काम के मामले में वरीयता देंगे तो आपके कलीग्स इस बात का विरोध कर सकते हैं और आपके खिलाफ हो सकते हैं।
4. अगर आपके और आपके स्पाउस के बीच जूनियर-सीनियर की हायरार्की है तो आपकी छवि पर इसका दुष्प्रभाव पड सकता है। ऐसे मामलों में अकसर लोग कहते हैं कि बॉस के साथ निजी संबंध बनाकर तरक्की के रास्ते ढूंढे जा रहे हैं।
5. देखा गया है कि इन रिश्तों का खमियाजा पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों को ज्यादा उठाना पडता है। कई बार डिपार्टमेंट से ट्रांसफर कर दिया जाता है और ज्यादा बुरी स्थितियों में कंपनी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
6. आप और आपके ऑफिस स्पाउस कलीग्स के गॉसिप का केंद्र बन सकते हैं, जिससे आपके लिए काम करने का माहौल खराब हो सकता है।
7. ऐसे रिश्तों की गॉसिप अकसर परफॉर्मेस पर हावी हो जाती है और लोग आपके काम को कम आंकने लगते हैं।
8। वर्कप्लेस अफेयर और ऑफिस स्पाउस में फर्क होता है लेकिन लोग ऐसे रिश्तों को एक ही निगाह से देखते हैं।

राजेश राना

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

खूब पानी पियो और स्वास्थ्य रहो


वैसे तो हम पानी तभी पीते हैं जब हमें जोर कि प्‍यास लगी हो, पर क्‍या आप जानते हैं कि पानी हमारे शरीर और त्‍वचा के लिए कितना फायदेमंद है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दमकती त्वचा पानी हो या मोटापे पर काबू पाना हो तो, सबसे जरूरी है कि आप भरपूर मात्रा में पानी पिएं। एक व्यक्ति को दिन भर में 8-10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।

पानी पीने के फायदे –

पाचन और कब्ज- सोकर उठने के बाद एक-दो गिलास पानी पीना पेट साफ करने के लिहाज से फायदेमंद होता है। ऐसा करने से आपको कब्जियत की परेशानी से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा। तांबे के लोटे में पानी पीना भी पेट के लिए काफी फायदेमंद है।

मोटापे से मुक्‍ती- पानी में कैलोरी की मात्रा शून्य होती है। पानी भूंख को कम करता है जिससे आपको ज्‍यादा भोजन करने की जरुरत नहीं पडती। ठंडा पानी पीना ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि यह जल्दी अवशोषित होता है।

त्‍वचा होगी खूबसूरत- आप अपने आप ही जवां दिखेगें अगर आप की त्‍वचा पूरी तरह से हाइड्रेटेड होगी तो। यह त्‍वचा की टिशू की भरपाई कर के उसमें लचीलापन लाता है और त्‍वाचा को नम रखने में मदद करता है, जिससे त्‍वचा में चमक आती है।

काम में ज्‍यादा मन लगना- अक्‍सर जो लोग ऑफिस में काम करते हैं वह अपने काम के चक्‍कर में पानी पीना भूल जाते हैं। पर आपको बता दें कि हमारे दिमाग को लगभग 90 % पानी की आवश्‍क्‍ता होती है। पानी पीने से आप अधिक सतर्क और अधिक केंद्रित हो कर काम कर सकेगें।

मोंच और ऐठन से राहत- यह शरीर की मासपेशियों में लचीलापन लाता है जिससे दौडते-भागते वक्‍त शरीर में मोंच नहीं आती।

दिल और गुर्दे के लिए फायदेमंद- पानी शरीर में फ्लू और अन्‍य बीमारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ने में मदद करता है। यह गुर्दे की पथरी और दिल का दौरा पड़ने से भी रोकता है। नींबू को पानी में मिला कर पीने से सांस संबधी, पेट की समस्‍या और गठिया रोगों से निजात मिलती है। कुल मिला कर यह हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को ठीक करता है।

थाकान से राहत- यह हमारे शरीर से खराब तत्‍व और विष रहित पदार्थो को पसीने के दा्रा निकालता है। अगर आपके शरीर में पानी की कमी है तो जाहिर सी बात है कि आपके दिल को शरीर की हर कोशिका में साफ खून पहुचाने में ज्‍यादा काम करना पडेगा। इसलिए हो सके तो अपने शरीर में पानी की अच्‍छे से पूर्ती करें वरना शरीर की हर कोशिकाओं में पानी की कमी हो जाएगी।

खाना खाने के दौरान पानी न पिएं- आयुर्वेद के मुताबिक शरीर से स्रावित होने वाले पाचक रस ही भोजन पचाने में सहायक होते हैं। भोजन के दौरान पिया गया पानी इन पाचक रसों को पतला बना देता है जिससे पाचन ठीक से नहीं हो पाता। बेहतर होगा कि भोजन के आधे घंटे पहले व बाद में पानी पिएं।

राजेश राना

पिटारी में से कुछ काम की बात..........


चलिए.....आज आपको दादी माँ / नानी माँ के नुक्से की पिटारी में से कुछ काम की बात बताते है.




आर्थराइटिस का दर्द हो या बालों के टूटने, झड़ने की समस्या। भारत में सदियों से दालचीनी और शहद के मिश्रण का इस्तेमाल होता चला आ रहा है। हकीम और वैद्य तो इसे लाख दवाओं की एक दवा बताते हैं। खास बात यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। यानी आप ऐलोपैथिक दवाओं के साथ भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। और क्या हैं इस जादुई मिश्रण के फायदे और कब कर सकते हैं, डालते हैं एक नजर..

1- दूर करे आर्थराइटिस का दर्द

आर्थराइटिस का दर्द दूर भगाने में शहद और दालचीनी का मिश्रण बड़ा कारगर है। एक चम्मच दालचीनी पाउडर लें। इसे दो तिहाई पानी और एक तिहाई शहद में मिला लें। इस लेप को दर्द वाली जगह परर लगाएं। 15 मिनट में आपका दर्द फुर्र हो जाएगा।

2- रोके बालों का झड़ना

गंजेपन या बालों के गिरने की समस्या बेहद आम है। इससे छुटकारा पाने के लिए गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं। नहाने से पहले इस पेस्ट को सिर पर लगा लें। 15 मिनट बाद बाल गरम पानी से धुल लें।

3- दांत दर्द में पहुंचाए राहत

एक चम्मच दालचीनी पाउडर और पांच चम्मच शहद मिलाकर बनाए गए पेस्ट को दांत के दर्द वाली जगह पर लगाने से फौरन राहत मिलती है।

4- घटाता है कोलेस्ट्राल

करीब आधा लीटर चाय में तीन चम्मच शहद और तीन चम्मच दालचीनी मिलाकर पीएं। दो घंटे के भीतर रक्त में कोलेस्ट्राल का स्तर 10 फीसदी तक घट जाता है।

5- सर्दी जुकाम की करे छुट्टी

सर्दी जुकाम हो तो एक चम्मच शहद में एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में तीन बार खाएं। पुराने कफ और सर्दी में भी राहत मिलेगी।

6- बढ़ाए वीर्य की गुणवत्ता

सदियों से यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में वीर्य की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शहद का इस्तेमाल होता रहा है। वैद्य पुरुषों को सोने से पहले दो चम्मच शहद खाने की सलाह देते हैं। ऐसी महिलाएं जो गर्भधारण नहीं कर पाती हैं उन्हें एक चम्मच शहद में चुटकी भर दालचीनी पाउडर मिलाकर मसूढ़ों पर लगाने के लिए कहा जाता है।

7- भगाए पेट का दर्द

शहद के साथ दालचीनी पाउडर लेने पर पेट के दर्द से राहत मिलती है। ऐसे लोग जिन्हें गैस की समस्या है उन्हें शहद और दालचीनी पाउडर बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करना चाहिए।

8-मजबूत करे प्रतिरक्षा तंत्र

रोजाना शहद और दालचीनी पाउडर का सेवन करने से प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है और आप वाइरस या बैक्टीरिया के संक्रमण से भी बचे रहते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि शहद में कई तरह के विटामिंस और प्रचुर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जो आपकी सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं।

9-बढ़ाए आयु

पुराने समय में लोग लंबी आयु के लिए चाय में शहद और चालचीनी पाउडर मिलाकर पीते थे। इस तरह की चाय बनाने के लिए तीन कप पानी में चार चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाया जाता था। इसे रोजाना तीन बार आधा कप पीने की सलाह दी जाती थी। इस तरह से बनी चाय त्वचा को साफ्ट और फ्रेश रखने में मदद करती है।

10- घटाए वजन

चलिए ....अब बात करे मोटापे की .......

खाली पेट रोजाना सुबह एक कप गरम पानी में शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से फैट कम होता है। यदि इसका सेवन रोजाना किया जाए तो मोटे से मोटे व्यक्ति का वजन भी घटना शुरू हो जाता है।

राजेश राना